विदेश मंत्रालय ने कुछ समय पहले पुलिस वेरिफिकेशन के लिए एम-पासपोर्ट पुलिस एप लांच किया था।
पासपोर्ट बनने में लगने वाला समय कम करने और पुलिस वेरिफिकेशन को अंतिम छोर तक पेपरलेस करने के लिए गृह विभाग और क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने कवायद शुरू की है। प्रदेश के सभी जिलों में एम-पासपोर्ट एप के जरिये पुलिस वेरिफिकेशन को पत्राचार शुरू हो गया है।
अधिकारियों का मानना है कि एप के जरिये पुलिस वेरिफिकेशन होने से समय के साथ वेरिफिकेशन भी ज्यादा भरोसेमंद होगी। विदेश मंत्रालय ने कुछ समय पहले पुलिस वेरिफिकेशन के लिए एम-पासपोर्ट पुलिस एप लांच किया था। इसका उद्देश्य यह था
कि फील्ड पर मौजूद वेरिफिकेशन करने वाले अधिकारी मौके पर ही पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट की फोटो खींचकर सिस्टम में डाल सकेंगे। इसकी बदौलत आवेदक के दस्तावेजों को डाउनलोड करने की समस्या नहीं रहेगी। वेरिफिकेशन की पूरी व्यवस्था पेपरलेस हो जाएगी।
सिर्फ 46 जिलों में बचा है एम-पासपोर्ट एप लागू होना
इस एप को हिमाचल में लांच करने के लिए गृह और पुलिस विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया है।
इसके अलावा वेरिफिकेशन में लगने वाला समय भी कम होगा। वर्तमान में पुलिस वेरिफिकेशन करने में प्रदेश पुलिस को औसतन 40 दिन लग रहे हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 35 दिन का है। तेलंगाना, आंध्रप्रदेश जैसे प्रदेशों में यह दो हफ्ते से भी कम समय में हो रहा है।
विदेश मंत्रालय द्वारा बनाए गए एम पासपोर्ट पुलिस एप देश के सिर्फ 46 जिलों में लागू होना बचा है। इनमें से बारह जिले हिमाचल के हैं, जहां यह लागू नहीं है। जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, महाराष्ट्र, पुडुचरी और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में लागू होना बचा है।
क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी प्रवीण मोहन सहाय कहते हैं कि इस एप को हिमाचल में लांच करने के लिए गृह और पुलिस विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया है। इस एप के इस्तेमाल से वेरिफिकेशन में काफी कमी आएगी। इससे लोगों को पासपोर्ट
आवेदक तक पहुंचाने में काफी कम समय लगेगा। एडीजीपी पुलिस मुख्यालय एपी सिद्दीकी ने कहा कि भौगोलिक परिस्थिति की वजह से वेरिफिकेशन में समय लगता था। उम्मीद है इससे समय की बचत भी होगी और पुलिस काम भी आसान होगा।