प्रदेश सरकार से अनुबंध खत्म होने के बाद जिला अस्पताल में चल रही एसआरएल लैब बंद हो गई है। इससे मरीजों को जांचें कराने में काफी परेशानी हो रही है। महंगी और विशिष्ट जांचें अस्पताल की पैथालॉजी में नहीं होने के कारण मरीजों को निजी केंद्रों पर जाकर पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। हालांकि, अब सरकार ने चंदन लैब के साथ अनुबंध कर लिया है, जो एक सप्ताह बाद काम शुरू करेगी।
जिला अस्पताल में दिसंबर 2015 में एसआरएल लैब खुली थी। लैब का अनुबंध नवंबर 2017 में प्रदेश सरकार ने 31 मार्च 2018 तक के लिए बढ़ा दिया था। सरकार ने एक अप्रैल से अनुबंध बढ़ाया नहीं। करार खत्म होने के कारण फर्म ने कम समेट लिया। नई फर्म चंदन को अनुबंध मिलने के बाद अभी तक उसने काम शुरू नहीं किया है। इससे मरीजों को विशिष्ट जांचों के लिए निजी पैथोलॉजी केंद्रों में जाना पड़ रहा है। एसआरएल लैब में थायराइड, टीएलसी-डीएलसी, एचबी-1सी, क्रिटनिन, विटामिन समेत 150 प्रकार की जांचें मुफ्त होती थीं। अब यही जांच बाहर से कराने पर मरीजों को पांच सौ से ढाई हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, एचबीवी डीएनए क्वांटिटेटिव, ब्लीडिंग डिसऑर्डर पैनल, रैपिड ब्लड कल्चर जैसी पांच हजार या उससे अधिक रुपये में हो रही हैं।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीके गुप्ता ने बताया कि चंदन लैब के अधिकारियों से उन्होंने बात की है। अधिकारियों ने एक सप्ताह बाद काम शुरू करने की बात कही है। शुरूआत में रक्त के सैंपल कानपुर भेजे जाएंगे। एक महीने में चंदन लैब झांसी में ही स्थापित हो जाएगी। इसके बाद झांसी में ही सैंपल की जांच होगी। फिर एक ही दिन में अधिकतर जांचों की रिपोर्ट मिल सकेगी। चंदन लैब भी 150 से अधिक प्रकार की जांचें करेगी।
हर माह होती थीं चार हजार जांचें
एसआरएल लैब में हर महीने चार हजार से अधिक जांचें होती थीं। हर महीने जांच पर लगभग दस लाख रुपये खर्च होते थे। जांचों का पूरा खर्च विश्व बैंक वहन करता था। जांच का सैंपल लेकर आगरा या गुरुग्राम भेजना पड़ता था। वहां से एक से तीन दिन में जांच रिपोर्ट आती थी।