नगर निकाय चुनाव में नामांकन की प्रकिया शुरु हो चुकी है। इसी क्रम में वाराणसी में भी मेयर पद के प्रत्याशियों ने मंगलवार को नामांकन कराया। सभी दलों ने गाजे बाजे के साथ नामांकन का जुलूस निकाला।
इस दौरान पार्टी कार्यकर्ता काफी जोश में नजर में आए। भाजपा की तरफ से मेयर पद की उम्मीदवार मृदुला जयसवाल ने नामांकन कराया। उनके साथ नीलकंठ, अनिल राजभर, रविंद्र जयसवाल, सौरभ, अवधेश, श्यामदेवराय चौधरी आदि लोग मौजूद थे।
भाजपा मेयर प्रत्याशी मृदुला जायसवाल के जुलूस में पार्टी के सभी जनप्रतिनिधि और मंत्री केसरिया तिलक लगाकर शामिल हुए। पूर्व सांसद स्व. शंकर प्रसाद जायसवाल के मुख से एक ही मंत्र निकलता था- जय श्रीराम। इस नाते उनकी पुत्रवधू का नामांकन केसरिया रंग से सराबोर हुआ।
कांग्रेस प्रत्याशी शलिनी यादव
- फोटो : अमर उजाला
भव्य तरीके से नामांकन जुलूस में निकला। जुलूस के दौरान पार्टी पदाधिकारियों काफी उत्साह नजर आया। जुलूस में तिलक प्रतिमा पर पर माल्यार्पण किया गया।
वहीं पूर्व सांसद श्यामलाल यादव की पुत्रवधु व कांग्रेस मेयर की प्रत्याशी शलिनी यादव ने भी नामांकन कराया। पार्टी के नेताओं के साथ पहुंची शलिनी यादव ने एडीएम प्रशासन के समक्ष नामांकन किया।
उनके साथ कई कार्यकर्ता मौजूद थे। नारे लगाने के साथ शालिनी यादव का जुलूस आगे बढ़ा। उधर, समाजवादी पार्टी में मेयर पद की उम्मीदवार साधना गुप्ता ने नामांकन कराया। उनके साथ जिले व शहर के कई बड़े नेता थे।
सपा प्रत्याशी साधना गुप्ता
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साधना के पति साधना पति प्रदेश सचिव सजंय गुप्ता भी उनके साथ मौजूद थे। सपा के जुलूस में शमिल सपा जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष को पुलिस ने रोक लिया।
साधना गुप्ता सभी उम्मीदवारों में सबसे अमीर हैं। उनके पास कुल तीन करोड़ 59 लाख चल और सात करोड़ 29 लाख की अचल संपत्ति हे। साधना के पति संजय शहर के जाने माने बिल्डर व कारोबारी हैं।
बहुजन समाज पार्टी की मेयर पद की प्रत्याशी सुधा चौरासिया ने भी नामांकन कराया। मुनकाद अली और शिवबोध राम के साथ पहुंची सुधा ने पर्चा भरा। सुधा के साथ नामांकन में कई बड़े नेता शामिल हुए।
बसपा प्रत्याशी सुधा चौरासिया
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शहर में हुए नामांकन के जुलूस से कई प्रमुख मार्गों पर जाम लग गया। जिससे लोगों को काफी परेशानी हुई। ऐसा कोई पहली बार नहीं हो रहा है कि नामांकन के जुलूस के दौरान यातायात से लेकर चुनाव से संबंधित तक के नियम न तोड़े जा रहे हो।
हर बार वादे किए जाते हैं कि नामांकन प्रक्रिया सादगी से होगी लेकिन वादा किसी को याद ही नहीं रहता है। कानून कायदों की धज्जियां उड़ाने वाले यही लोग हमारे जनप्रतिनिधि बनकर सामने आते हैं।
लोगों से चुनाव से पहले वादा करने वाले ये नेता चुनाव प्रक्रिया से ही अपने वादों को तोड़ने लगते हैं। जब हमारे जनप्रतिनिधि ही जागरूक नहीं हैं तो किसी और को क्या कहा जाए।