ब्लाक शमसाबाद में मंझना से बैरमपुर तक गुजरी नहर करीब एक साल से सूखी पड़ी है। इसके कारण इस नहर से जुड़े करीब 30-35 गांवों के हजारों ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण निजी नलकूपों से सिंचाई करने को मजबूर हैं। पानी न आने से नहर में घासफूस खड़ी है।
मंझना से बैरमपुर गई नहर से उलियापुर, परमनगर, गंगलऊ, सुतहड़ी, नगला नान, कलुआपुर, बैरमपुर, भटपुरा, गदनपुर, असगरपुर, अमलैया आशानंद, बघऊ, खगऊ, शुकरुल्लापुर और मिल्किया समेत करीब 30-35 गांवों के ग्रामीण अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं। पर इस नहर में करीब एक साल से पानी ही नहीं आ रहा है।
मजबूरी में किसान 300 रुपये प्रति बीघा के हिसाब से फसल की सिंचाई करने को मजबूर हैं। उलियापुर के दिनेशचंद्र, शिवकुमार का कहना है कि कई बार उप जिलाधिकारी कायमगंज और जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर नहर में पानी छोड़े जाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
दयानंद चतुर्वेदी, गुड्डू दुबे, आनंद कुमार, गुजरु गंगवार और राकेश कुमार आदि ग्रामीणों का कहना है कि नहर में घासफूस खड़ी है। जनप्रतिनिधियों से भी नहर में पानी छुड़वाए जाने की मांग की, लेकिन उन्होंने भी कोई ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों का कहना है कि नहर में अगर पानी आ जाए तो महंगे दाम पर सिंचाई करवाने से मुक्ति मिल जाए। उन्होंने जिला प्रशासन व मुख्यमंत्री से नहर में पानी छुड़वाए जाने की मांग की है।