मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी पर हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद राज्य सरकार अलर्ट है। भोपाल में हनुमान जन्मोत्सव पर जुलूस की अनुमति पहले दी, फिर निरस्त कर दी। वहीं, भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट पर नजर रखी जा रही है।
रामनवमी पर खरगोन और बडवानी जिलों में दो गुटों में आपसी झड़प के बाद राज्य सरकार सतर्क है। भोपाल में हनुमान जन्मोत्सव पर जुलूस की अनुमति पहले दी, फिर शनिवार को निरस्त कर दी। भोपाल में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है। सरकार कोई जोखिम उठाना नहीं चाहती। इस वजह से सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है और भड़काऊ पोस्ट डालने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
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जुलूस के आयोजकों से प्रशासन ने डीजे के गाने और नारों की सूची मांगी थी। इससे पहले शहर काजी भी शहर गंगा-जमुनी तहजीब की बात कह चुके हैं। चिंता इस बात की थी कि शनिवार को हनुमान जन्मोत्सव पर हिंदू संगठनों का जुलूस बुधवारा और इतवारा से निकाला जाना था। हिंदू संगठनों और पुलिस प्रशासन के बीच चर्चा के बाद परंपरागत मार्ग से ही जुलूस निकालने की अनुमति दी गई। आयोजकों को 16 शर्तों का ध्यान रखने की हिदायत दी गई। हनुमान जन्मोत्सव का जुलूस पुराने शहर के काली मंदिर से शुरू होकर सिंधी कॉलोनी पर खत्म होगा इन पूरी जगह पर लगभग 80 से 85 मस्जिद है। मुसलमानों की संख्या डेढ़ लाख के करीब है। बाद में इस अनुमति को निरस्त कर दिया गया।
भड़काऊ पोस्ट पर एक साल इंटरनेट रहेगा बैन
पुलिस ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने वाले व्यक्ति को एक साल तक इंटरनेट के इस्तेमाल से वंचित करने की तैयारी की है। पिछले कुछ दिनों से असामाजिक तत्वों द्वारा अफवाहें फैलाकर अशांति फैलाने की कोशिश की जा रही है। इसे रोकने भोपाल पुलिस ने ऑपरेशन यथार्थ शुरू किया है। अभी तक अलग-अलग समुदाय के पांच लोगों के विरुद्ध इंटरनेट मीडिया में भड़काऊ एवं अफवाह फैलाने के विरुद्ध आइपीसी की धारा 153ए के अंतर्गत एफआइआर दर्ज हो चुकी है। इसमें तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है। इन लोगों के ऊपर सीआरपीसी की धारा 108 के अंतर्गत एक वर्ष के लिए समाज में अशांति ना फैलाने के लिए बाउंड ओवर किया जा चुका है।