सत्ता के सेमीफाइनल के तहत अमर उजाला का चुनावी रथ पहुंचा है जबलपुर। जबलपुर जिले और संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें जबलपुर पूर्व, जबलपुर पश्चिम, जबलपुर उत्तर, जबलपुर छावनी, पनागर, सिहोरा, पाटन और बारगी शामिल हैं। इनमें सिहोरा अनुसूचित जनजाति और जबलपुर पूर्व सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है। आइए जानते हैं क्या है इन विधानसभाओं में खास-
जबलपुर पूर्व सीट पर बहरहाल भाजपा का कब्जा है और यहां से अंचल सोनकर विधायक हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के लखन घनघोरिया को लगभग 1100 मतों से शिकस्त दी थी।
जबलपुर का पश्चिम विधानसभा क्षेत्र नर्मदा किनारे बसा शहरी क्षेत्र है। तीन चुनावों यानी 1998, 2003, 2008 में भाजपा ने जीत का अंतर लगातार बढ़ाया, लेकिन 2013 में हुए चुनावों में कांग्रेस ने अप्रत्याशित रूप से भाजपा के गढ़ में सेंध लगाकर यह सीट जीत ली।
जबलपुर उत्तर से भाजपा के शरद जैन विधायक हैं और अभी वह चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं, पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के नरेश सर्राफ को हराया था।
जबलपुर छावनी सेना और कैंट से जुड़ी जबलपुर छावनी सीट पर भाजपा के अशोक रोहाणी का कब्जा है। उन्होंने पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के चमन श्रीवास्तव को भारी मतों से हराया था।
2008 से पूर्व पनागर विधानसभा सुरक्षित सीट थी। परिसीमन के बाद यह सामान्य सीट हो गई है। 2013 के विधानसभा चुनाव में यहां से भाजपा के सुशील तिवारी इंदु, कांग्रेस के रुपेंद्र पटेल से भारी मतों से जीते थे।
सिहोरा विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित हैं और इस सीट पर पिछले कुछ चुनावों से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अजेय रही है। नंदनी मरावी ने 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जमुना मरावी को शिकस्त दी थी
जबलपुर की पाटन सीट पर अभी कांग्रेस का कब्जा है। कांग्रेस नेता नीलेश अवस्थी इस क्षेत्र से विधायक हैं। इससे पहले तक ये सीट भाजपा के कब्जे में थी, और इसे उसका गढ़ माना जाता था।
जबलपुर जिले की अन्य विधानसभा सीटों की तरह ही बारगी सीट पर भी भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुख्य मुकाबला रहता है। भाजपा की प्रतिभा सिंह ने कांग्रेस के ठाकुर सोबरन सिंह को हराकर यह सीट जीती थी, जिसके बाद से प्रतिभा सिंह लगातार जीत दर्ज कर रही हैं