मध्यप्रदेश में भाजपा के 53 बागियों को बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद अब संकेत मिल रहे हैं कि कांग्रेस भी इसी तरह की कार्रवाई अपने बागियों पर कर सकती है।
दरअसल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से जब इस बारे में सीधा सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, "हम बागियों की सूची मंगा रहे हैं, कई बागियों ने फोन किया है कि हमने नामांकन वापस नहीं लिया है। एक-दो दिन में फैसला करेंगे।"
मध्यप्रदेश में नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 14 नवंबर थी। टिकट कटने से नाराज कई विधायकों और दूसरे नेताओं ने निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतरने का फैसला कर लिया। अब कमलनाथ ऐसे नेताओं से फोन पर बात करने का जिक्र कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि मान-मनौव्वल का दौर न चला हो लेकिन कुछ ऐसी सीट रहीं जहां कांग्रेस बागियों को घर में ही राजीनामा करने पर मना नहीं पाई।
उज्जैन दक्षिण से राजेंद्र वशिष्ठ के सामने बागी जयसिंह दरबार मैदान में हैं। जयसिंह को चुनाव चिह्न 'लिफाफा' मिला है। महिदपुर से भी कांग्रेस के बागी दिनेश जैन बोस को 'ट्रैक्टर चलाता किसान' चिन्ह मिल चुका है। वहीं उज्जैन उत्तर में माया त्रिवेदी 'टॉर्च' चुनाव चिन्ह पर लड़ेंगी। आलीराजपुर की जोबट से भी विशाल रावत कांग्रेस की राह में रोड़ा अटकाने का काम करेंगे।
इस बार भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही जगह बड़े पैमाने पर बागी सामने आए हैं। मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को होने वाले मतदान से पहले बागियों को साधने की चुनौती भी बड़ी है।