पंजाब सरकार के पास फंड की कमी के कारण अब कई विभागों के कर्मचारियों को कई महीने से वेतन मिलना भी बंद हो गया है। डेराबस्सी में करीब 55 साल से चल रहा मार्केट कमेटी का दफ्तर पंजाब सरकार की अनदेखी का शिकार होकर रह गया है। हालत यह है कि पंजाब मंडी बोर्ड ने बीते दो साल से मार्केट कमेटी को दी जाने वाले वार्षिक ग्रांट 25 लाख रुपये जारी नहीं की गई। वहीं फसलों की आमद कम होने से आमदनी भी कम हो गई। फंड की कमी के कारण कर्मचारियों को पिछले आठ महीने से वेतन नहीं दिया जा रहा है। कर्मचारियों को बिना वेतन के घर चलाना मुश्किल हो गया है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 1962 से डेराबस्सी में मार्केट कमेटी का दफ्तर चल रहा है। लेकिन जो स्थिति इस दफ्तर की पिछले दो सालों से बनी है वह इससे पहले कभी नहीं आई। हरियाणा व चंडीगढ़ की सीमा पर स्थित इस क्षेत्र के किसान अपनी फसलों को यहां की मंडी में लाने की बजाय चंडीगढ़, पंचकूला, बरवाला व अंबाला में बेचने को पहल देते हैं। पहले यह पूरा क्षेत्र खेती पर निर्भर करता था। लेकिन, शहरीकरण बढ़ने से खेती लगातार कम होती जा रही है। इस कारण अब मंडियों में फसलों की कमी आ गई है।
पंजाब मंडी बोर्ड की ओर से दफ्तर का खर्च चलाने व कर्मचारियों के वेतन के लिए 25 लाख रुपये वार्षिक ग्रांट दी जाती है। लेकिन दो साल से न तो मंडी बोर्ड ग्रांट जारी कर रहा है। हाल यह है कि आठ महीने से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा है। यहां पर पहले नौ कर्मचारी थे, जिनमें से एक लेखाकार व सेवादार रिटायर हो चुके हैं। जबकि, सात कर्मचारी तैनात हैं। इसमें एक सेवादार, एक क्लर्क, दो मंडी सुपरवाइजर, दो बोली इंस्पेक्टर व एक चौकीदार शामिल है। जानकारी के अनुसार, नौकरी कर रहे कर्मियों के अलावा रिटायर होने वाले कर्मियों को भी अभी तक बकाया नहीं मिल रहा है। दफ्तर की हालत भी खस्ता होती जा रही है।
मंडी बोर्ड के चेयरमैन चांद राणा ने बताया कि दो साल से ग्रांट जारी नहीं होने से आठ महीने से कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि मामला सीपीएस व हलका विधायक एनके शर्मा के ध्यान में लाया गया है। उन्होंने जल्द ही समस्या का हल करवाते हुए ग्रांट जारी करवाने का भरोसा दिया है।