हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा के कारण जानमाल के नुकसान को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दायर याचिका पर वीरवार को कोर्ट ने बीमा कंपनियों को दो माह के भीतर सभी क्लेम का निपटारा करने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता ने इस मामले में कोर्ट से अपील की थी कि वह बीमा कंपनियों को क्लेम निपटारे की प्रक्रिया आसान करने का आदेश दें।
वीरवार को विभिन्न बीमा कंपनियों ने हाईकोर्ट के जस्टिस एसएस सारों और जस्टिस गुरमीत राम की खंडपीठ के समक्ष स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर अब तक किए गए क्लेम के भुगतान की जानकारी दी। बीमा कंपनियों ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने लगभग 86 प्रतिशत क्लेम के मामलों का निपटारा कर दिया है। कंपनियों की इस रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने सभी बीमा कंपनियों को निर्देश दिया कि वे दो महीने के भीतर सभी क्लेम का निपटारा करें।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया कि सरकार हिंसा के दौरान पूरी तरह जल गए वाहनों के क्लेम सेट करने में बीमा कंपनियों की सहायता करें। इस मामले में दायर की गई जनहित याचिका में कहा गया था कि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हरियाणा में भारी तादाद में लोगों के वाहन, दुकानें, घर, सामान और अन्य चीजें आगजनी व तोड़फोड़ का शिकार हुई हैं।
याचिका में कहा गया कि जिन लोगों ने अपनी दुकान, वाहन या स्टाक का बीमा करवाया था उन्हें बीमा कंपनियों के कठोर नियमों के तहत बीमा क्लेम आसानी से नहीं मिल रहा। याचिकाकर्ता अरविंद सेठी ने हाईकोर्ट की बेंच से आग्रह किया कि वे सभी बीमा कंपनियों को निर्देश दें कि सभी कंपनियां अपने नोडल अधिकारी नियुक्त करें, जो केवल जाट आरक्षण आंदोलन की हिंसा के शिकार लोगों के क्लेम के लिए काम करें। कंपनी इन लोगों के क्लेम के लिए अपने नियमों में भी सरलता लाए।