हिमाचल हाईकोर्ट ने सूबे में वन भूमि पर पांच बीघा से अधिक के तमाम अवैध कब्जों को तुरंत प्रभाव से हटाने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए प्रदेश सरकार को कहा कि अवैध कब्जे हटाने के लिए समय-समय पर पारित आदेशों की अक्षरश अनुपालना सुनिश्चित की जाए,
अन्यथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने इसके लिए ग्राम पंचायतों,
ग्राम सभाओं, ग्राम समितियों, जिला परिषद के पदाधिकारियों, वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों और पुलिस विभाग की जिम्मेदारी तय की है। मामले पर सुनवाई 20 दिसंबर को होगी।
प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रधान मुख्य वन अरण्यपाल को आदेश दिए हैं कि वह पिछले छह महीनों का रिकॉर्ड न्यायालय के समक्ष पेश करें और बताएं कि उन्होंने 6 अप्रैल 2015 को पारित आदेशों की अनुपालना करते हुए कितने कब्जाधारियों पर कार्रवाई की।
विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश
हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार के उपरोक्त अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि वह विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष दायर करें जिसमें कि इस बात का खास तौर पर उल्लेख हो कि जो लोग सरकारी भूमि का उपयोग करते हुए लाभ प्राप्त कर रहे थे, उनसे रिकवरी करने के लिए क्या कार्रवाई की।
हाईकोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि जिन कब्जों से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय पारित कर लिया है और जिन कब्जाधारियों की ओर से भूमि को खाली किया जाना है, उनके द्वारा खेती के लिए उपयोग में लाई गई भूमि पर सेब व अन्य फल देने वाले पौधों की प्रूनिंग करने की अनुमति न दी जाए।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कब्जाधारियों को इस भूमि पर किसी भी तरह के बीज उगाने की अनुमति प्रदान न की जाए। न्यायालय ने अधिकारियों को यह भी आदेश दिए हैं कि वह अतिक्रमण की गई भूमि और नए मामले पर अपनी पैनी नजर रखे और तुरंत कार्रवाई करें।
10307 कब्जे, ढाई हजार पर होगी कार्रवाई
हिमाचल में वन भूमि पर कुल 10307 कब्जे हैं। इसमें से ढाई हजार से ज्यादा कब्जे पांच बीघा से अधिक वन भूमि पर हैं। हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद से इनपर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
ऊपरी शिमला सहित कुल्लू जिला में कई लोगों ने वन भूमि पर कब्जे किए हुए हैं। कोर्ट के आदेश पर कुछ कब्जे हटाए भी गए, लेकिन आरोप लगे कि अधिकतर कब्जे गरीबों के हटाए गए। रसूखदारों पर मेहरबानी बरती गई।
जस्टिस राजीव शर्मा ने दिए थे कब्जे हटाने के आदेश
हिमाचल हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश राजीव शर्मा की खंडपीठ ने अप्रैल 2015 में आदेश दिए थे कि वन भूमि पर सभी तरह के अतिक्रमण को हटाया जाए। आदेशों में वन भूूमि पर कब्जा करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा था।