कांग्रेस के बाद भाजपा ने भी पार्टी की मर्जी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे बागी नेताओं पर कार्रवाई शुरू कर दी है। भाजपा ने पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने और पार्टी विरोधी कार्य के लिए 7 वरिष्ठ नेताओं को पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
इनमें चंबा के भाजपा विधायक बीके चौहान, डीके सोनी, पालमपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रवीण शर्मा, भरमौर के ललित ठाकुर, फतेहपुर के बलदेव ठाकुर, जसवां-परागपुर के हंसराज और रेणुका विधानसभा क्षेत्र से हृदय राम शामिल हैं। भाजपा ने इन्हें 6 साल के लिए बाहर का रास्ता दिखाया है।
इससे पहले कांग्रेस भी अपने ऐसे 7 नेताओं को निष्कासित कर चुकी है जो पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं। पार्टी से टिकट न मिलने के कारण ये नेता रुष्ट हो गए। ऐसे में इन्होंने विधानसभा चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया।
पार्टी के खिलाफ काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगाः सत्ती
26 अक्तूबर को भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें मनाने की कोशिश की लेकिन ये जिद्द पर अड़े रहे। नामांकन वापस न लेने के बाद पार्टी ने इन्हें एक और मौका दिया कि भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में चुनाव प्रचार करें लेकिन इन्होंने वरिष्ठ नेताओं की एक न सुनी।
सोमवार को पार्टी कार्यालय में वरिष्ठ भाजपा पदाधिकारियों की बैठक हुई जिसमें सर्वसहमति से इन्हें निष्कासित करने का फैसला लिया गया। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि पार्टी के खिलाफ काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने वालों को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया है।
कांग्रेस ने निष्कासित किए तीन और बागी
वहीं कांग्रेस ने पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लड़ने पर तीन और प्रत्याशियों को पार्टी से बाहर कर दिया है। कांग्रेस ने ऊना सदर से राजीव गौतम, कुटलैहड़ से शिव हरिपाल और पच्छाद से रत्न सिंह कश्यप को छह साल के लिए निष्कासित किया है।
राजीव गौतम ऊना सदर से कांग्रेस प्रत्याशी सतपाल सिंह रायजादा, शिव हरिपाल कुटलैहड़ से कांग्रेस प्रत्याशी विवेक शर्मा और रत्न सिंह कश्यप पच्छाद से गंगूराम मुसाफिर के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए खड़े हो गए।
अब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और हिमाचल प्रभारी सुशील कुमार शिंदे के निर्देश के अनुसार हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ आजाद उम्मीदवार के तौर पर लड़ रहे उम्मीदवारों को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया गया है।
उनकी प्राथमिक सदस्यता को छह साल के लिए रद्द कर दिया गया है। पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ बगावत कर चुनाव लड़ने वाले सात निर्दलीय उम्मीदवारों को कांग्रे से पहले ही निष्कासित किया जा चुका है।