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हरीश रावत का ऐलान, मेरी कविता पूरी करने वाले को मिलेगा ईनाम

Tue, 08 Aug 2017 05:29 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
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harish rawat facebook post
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत विशुद्ध रूप से राजनीतिज्ञ हैं। मगर अब वह कविता भी करने लगे हैं। जिन्हें यकीन नहीं, वे उनकी फेसबुक वॉल पर जाकर इस कथन की पुष्टि कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट को लेकर अकसर चर्चा में रहने वाले हरीश रावत ने केंद्र की मोदी सरकार पर तंज करती एक कविता पोस्ट की है। 
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ये कविता कम और तुकबंदी ज्यादा प्रतीत होती है। इसे अपनी पोस्ट में हरीश रावत ने स्वीकारा भी है। साथ ही पोस्ट की गई कविता को लयबद्ध और बेहतर करने के एवज में पांच हजार रुपये के ईनाम का एलान भी किया है।

अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा है, ‘मैं न कवि हूं न कवि हृदय।? विशुद्ध राजनीतिज्ञ हूं। मगर जिन्होंने पिछले चार वर्षों से नमो नमो के स्वर को गुंजायमान कर अपना गला फ ाड़ दिया, उनके लिए मैं चिंतित और व्यथित हूं। नौजवानों के लिए नौकरियों के अवसर घट रहे हैं।’ 
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उनका कहना है कि उनकी इस तुकबंदी को जो और बेहतर बना देगा और इसे लयमय कविता में बदल देगा, उसे वह पांच हजार रुपये का ईनाम देंगे। यही नहीं उनकी तुकबंदी की काट में उससे बेहतर तुकबंदी बनाने वाले के लिए भी उन्होंने पांच हजार रुपये के ईनाम का एलान किया है। इसके लिए उन्होंने सोशल मीडिया पर ही तीन व्यक्तियों से आग्रह किया है कि वे जज के पैनल के रूप में उनका अनुरोध को स्वीकारें।
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ये है कविता

harish rawat - फोटो : google
खोलो लाल अब आंखें खोलों, दिल के साथ कुछ दिमाग को भी टटोलो। 3.5 साल यूं ही बीत गए, तीज त्योहार सब आए और चले गए। पर अच्छे दिन और दूर भए, मन की बात कहते कहते भय्या भूल गए। जनधन के खाते सूखे रह गए, न आमदनी दुगनी हुई न महंगाई कम हुई। 

कर्ज माफ नहीं हुआ यूं ही मर गए, फिर भी वो मन की बात कहते चले गए। डबल इंजन दिया, 20 हजार पद खाली, फि र भी नौकरी को तरसते रह गए। अब तो भय्या नौकरी का दरवाजा खोलो, कभी तो युवा के मन की बात बोलो। उठो भय्या दिल का दरवाज़ा खोलो, वक्त बीत रहा, मन की आंखे खोलो, अब तो नौकरी का दरवाजा खोलो।
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