ग्वालियर रोड क्रासिंग पर सड़क न बनने के कारण धूल और गिट्टी हवा में उछल रही हैं। गिट्टी कई बार लोगों को भी लग चुकी हैं। मगर, इसके बाद भी रेल प्रशासन लोगों की इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है।
झांसी- कानपुर डबल ट्रैक परियोजना में झांसी से पारीछा तक पटरी डालने का काम पूरा कर लिया गया है। ग्वालियर रोड क्रासिंग पर पटरी डलने के बाद यहां पक्की सड़क बननी है। रेलवे ने पक्की सड़क डालने के लिए अलग- अलग दिनों में तीन बार ब्लाक लिया। मगर, इस अवधि में ठेकेदार ने गिट्टी और डस्ट ही सड़क पर डाली। डामर डालकर पक्की सड़क बनाने का काम नहीं किया। इस काम को हुए दो महीने का समय बीत गया है। पक्की सड़क न बनने से डस्ट हवा में उड़ रही है और गिट्टी उछल कर लोगों में लग रही है। दो पहिया वाहन चालकों को गाड़ी फिसलने का भी डर बना रहता है। रेल प्रशासन की अनदेखी और ठेकेदार की लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रभारी जनसंपर्क अधिकारी नीरज भटनागर ने बताया कि जल्द ही सड़क बनवाने का काम पूरा कराया जाएगा। गौरतलब है कि इस क्रासिंग से 24 घंटे के भीतर मालगाड़ियों सहित 70 ट्रेनें गुजरती हैं और लगभग 14 घंटे क्रासिंग बंद रहती है।
महीने में गुजरते है 1.75 लाख वाहन
रेलवे हर तीन साल के अंतराल में रेलवे क्रासिंग से गुजरने वाले वाहनों का सर्वे कराता है। 24 घंटे में रेलवे क्रासिंग से कितने वाहन गुजरे (पैदल यात्री को छोड़कर), यहां तक कि साइकिल सवार को भी सर्वे में जोड़ा जाता है। अभी इस क्रासिंग से महीने में 1.75 लाख वाहन गुजरते हैं।
गाड़ी पंचर हो चुकी है
मेरा दतिया और पाल कॉलोनी में अक्सर आना-जाना बना रहता है। गिट्टी में गाड़ी को निकालना मुश्किल हो जाता है। एक बार तो गाड़ी भी पंचर हो चुकी है।
नीरज स्वामी, स्वामीपुरम कॉलोनी।
काम पूरा करना चाहिए
रेलवे ने जब काम शुरू किया था उसे पूरा भी कराना चाहिए। गिट्टी से निकलना तो मुश्किल होता ही है। धूल उड़ने से सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है।
शैलेंद्र शर्मा, तहसील।
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गाड़ी का शीशा टूटा
क्रासिंग पर जाम खुलने पर तेजी से वाहन निकलते हैं। उस समय बड़ी गाड़ियों के पहियों से दबकर गिट्टी हवा में तेजी से उछलती है। मेरी गाड़ी का एक बार शीशा भी टूट चुका है।
रितिका दुबे, पन्नालाल मुहल्ला।
जल्दी सड़क बनना चाहिए
रेलवे को जल्द सड़क बनवाना चाहिए, ताकि लोगों को इस समस्या से निजात मिल सके। मुझे तो क्रासिंग से निकलते वक्त गाड़ी से गिरने का ही डर बना रहता है।
दीप्ति प्रजापति, इंद्रपुरी कॉलोनी।