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करवाओगे पानी की जांच तो नहीं आएगी फसल उत्पादन पर आंच : डीसी

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करवाओगे पानी की जांच, नहीं आएगी फसल उत्पादन पर आंच यह केवल एक संदेश नहीं बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने का प्रभावी माध्यम है। यह बात जिला उपायुक्त वर्षा खांगवाल ने कही। उन्होंने किसानों से आह्वान किया है कि वे अपने खेतों में सिंचाई के लिए उपयोग किए जा रहे ट्यूबवेल के पानी की नियमित जांच अवश्य करवाएं।
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उन्हाेंने कहा कि समय-समय पर पानी की गुणवत्ता की जांच करवाने से फसल उत्पादन सुरक्षित रहता है, मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है तथा वैज्ञानिक तरीके से खेती करना आसान होता है। सिंचाई जल की गुणवत्ता का सीधा प्रभाव फसल की वृद्धि, उत्पादन और मिट्टी की सेहत पर पड़ता है। यदि पानी में लवणता या क्षारीयता अधिक हो तो धीरे-धीरे भूमि की उत्पादकता प्रभावित होने लगती है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में जल परीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर किसान उचित फसल का चयन कर सकते हैं और संतुलित उर्वरक एवं सिंचाई प्रबंधन अपनाकर बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।

पानी का नमूना लेने की सही विधि अपनाएं किसान
कृषि उपनिदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह मलिक ने बताया कि पानी का नमूना लेते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। किसान सबसे पहले ट्यूबवेल को लगातार लगभग 30 मिनट तक चलाएं, ताकि वास्तविक जल गुणवत्ता का नमूना प्राप्त हो सके। इसके बाद लगभग 500 मिलीलीटर अथवा एक लीटर की साफ प्लास्टिक की बोतल में पानी भरें। किसान अपने ट्यूबवेल के पानी का नमूना निकटतम मृदा स्वास्थ्य जांच प्रयोगशाला में जमा करवा सकते हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर कृषि विशेषज्ञ किसानों को उपयुक्त फसल चयन, सिंचाई जल प्रबंधन और उर्वरकों के संतुलित उपयोग संबंधी आवश्यक सलाह प्रदान करेंगे। अधिक जानकारी के लिए किसान कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के टोल फ्री नंबर 1800-180-2117 पर संपर्क कर सकते हैं।
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