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इटावा पुलिस ने 3 तस्करों को किया गिरफ्तार, बरामद किए 745 कछुए

Mon, 19 Nov 2018 06:20 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- पूछताछ में बताया कि नेपाल और कलकत्ता भेजे जा रहे थे कछुए 
- कछुओं को चंबल और यमुना नदी से पकड़ा गया था 
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इटावा पुलिस ने तीन कछुआ तस्करों को गिरफ्तार किया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के इटावा जिले में सैफई पुलिस ने सोमवार को दुमीला गांव के पास वाहन चेकिंग के दौरान तीन कछुआ तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने तस्करों के पास से 745 कछुए बरामद किए हैं।
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एक तस्कर भाग निकला। चंबल और यमुना नदी से पकड़े गए ये कछुए लोडर से कोलकाता और नेपाल भेजे जा रहे थे। इन कछुओं की कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये बताई जा रही है। 

अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण राम बदन सिंह ने बताया कि सैफई पुलिस ने चेकिंग अभियान के दौरान दुमीला बार्डर के पास से एक लोडर को पकड़ा जिसमें 745 कछुए जिंदा बोरों में रखे हुए थे। मौके से तीन तस्करों को दबोचा, जबकि चौथा भागने में सफल रहा।
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तस्करों की पहचान मैनपुरी के करहल थाना क्षेत्र के गिहार कॉलोनी निवासी अशोक कंजड़ पुत्र गयादीन, करहल के रती का नगला निवासी सतीश पुत्र साहब सिंह जाटव और करह के सिंहपुर निवासी संजू पुत्र जालिम सिंह के रूप में हुई है।

बरामद कछुए - फोटो : अमर उजाला
भाग निकले बदमाश की पहचान भरथना निवासी राजकपूर पुत्र मुन्नीलाल के रूप में हुई है।  पूछताछ में इन बदमाशों ने बताया कि इन कछुओं को उन्होंने यमुना और चंबल नदी से पकड़ा है। कछुओं को भरथना में राजकपूर के घर से लोडर में लादकर कोलकाता और नेपाल बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। तस्करों का कहना है कि कोलकाता और नेपाल में इन कछुओं की अच्छी कीमत मिल जाती है।

पुलिस ने लोडर को सीज कर आरोपियों को जेल भेज दिया है। वहीं कछुओं को वन्य जीव विभाग के हवाले कर दिया गया है। बताया गया कि अशोक और संजू पर पहले से करहल थाने में तस्करी के दो मामले दर्ज हैं। कामयाबी पाने वाली पुलिस की टीम में प्रभारी निरीक्षक सैफई जीवाराम यादव, निरीक्षक क्राइम नेत्रपाल सिंह, उपनिरीक्षक वासुदेव सिंह, कांस्टेबल नीरज बाबू, मनोज कुमार, लव रावत, जितेंद्र कुमार, महेंद्र सिंह शामिल हैं। 

शक्तिवर्धक दवाइयों में होता है कछुओं की झिल्ली का इस्तेमाल  
वन विभाग के अफसरों की मानें तो कछुओं की तस्करी करने वाले लोगों के माल की खपत पश्चिमी बंगाल में है। वहां के लोग लालच देकर कछुओं की तस्करी को प्रोत्साहित करते हैं। कछुओं की केलिपी(झिल्ली) को सुखाकर दवाइयों में इस्तेमाल की जाती है। अधिकतर शक्तिवर्धक दवाइयों में भी झिल्ली का इस्तेमाल होता है।  
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पुलिस हिरासत में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
चार लाख रुपये किलो तक बिकती है कछुए की झिल्ली
भारतीय बाजार के अलावा विदेशी बाजार में कछुओं की झिल्ली की डिमांड है। देश में करीब 70 से 80 हजार रुपये किलोग्राम झिल्ली बेची जाती है। विदेशी बाजार में कछुए की झिल्ली की कीमत तीन से चार लाख रुपये हो जाती है।  

नदी के किनारे रहने वाले बेरोजगार आते हैं लालच में  
सूत्रों की मानें तो पश्चिमी बंगाल की कंपनियों के एजेंट चंबल, यमुना समेत नदी के किनारे रहने वाले बेरोजगारों को कछुओं की तस्करी करने के लिए उकसाते हैं।   

छह माह पहले स्टेशन पर कछुए की झिल्ली पकड़ी थी 
छह माह पहले करोड़ों रुपये कीमत की कछुओं की झिल्ली वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने पकड़ी थी। इसमें पश्चिमी बंगाल के तस्कर को गिरफ्तार भी किया गया था। कल्लू नाम का सरगना फरार हो गया था। उसको पुलिस ने बाद में जेल भेजा था। इस शिकंजे के बाद लगा कि कछुए की तस्करी बंद हो गई। लेकिन अचानक इतनी बड़ी मात्रा में कछुए की खेप पकड़ी जाने से वन विभाग की नींद में खलल पड़ गई।
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