आईआईटी कानपुर में दलित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुब्रमण्यम सडरेला के उत्पीड़न मामले में बोर्ड ऑफ गवर्नेंस (बीओजी) के फैसले को लागू करने का काम भी शुरू हो गया है। दलित उत्पीड़न में दोषी पाए गए चारों प्रोफेसरों को मिनट्स की कॉपी देते हुए 27 नवंबर तक उनसे जवाब मांगा गया है।
17 अक्तूबर को हुई बोर्ड बैठक के मिनट्स शनिवार को जारी किए गए। मिनट्स के मुताबिक दोषी पाए गए प्रो. संजय मित्तल की हाई एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रांट (एचएजी) रोकी गई है। एक साल तक प्रो. मित्तल खुद को सीनियर प्रोफेसर नहीं कह पाएंगे। उन्हें सातवें वेतनआयोग का लाभ भी एक साल तक नहीं दिया जाएगा। दूसरे प्रो. सीएस उपाध्याय को एक साल के लिए एसोसिएट प्रोफेसर बना दिया गया है।
आईआईटी धनबाद के निदेशक प्रो. राजीव शेखर पर डिमोशन की कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मंजूरी मांगी गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि सीधे आईआईटी कानपुर प्रशासन धनबाद के निदेशक पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है। वहीं प्रो. ईशान शर्मा को कड़ी चेतावनी दी गई है।