कन्नौज-फर्रुखाबाद रेलवे लाइन पर हो रहा काम। अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
रेलवे का सफर अब और बेहतर होने वाला है। सब कुछ ठीक रहा तो नवंबर 2018 तक कल्याणपुर से मथुरा के बीच रेल लाइन का विद्युतीकरण का काम पूरा हो जाएगा। 330 किमी में बिछाई जाने वाली विद्युत लाइन के काम को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन कंपनी ने काम शुरू कर कल्याणपुर से बिल्हौर के बीच पोल लगा दिए हैं।
नवंबर से कानपुर-मथुरा के बीच इलेक्ट्रिक ट्रेन दौड़नी शुरू होगी। रेलवे विभाग की कंपनी इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोडक्ट मैनेजर अतिवीर यादव ने बताया काम शुरू कर दिया है। कंपनी ने कल्याणपुर से मथुरा तक बिजली पोलों को लगाने का स्थान चिह्नित कर लिया हैं। सभी की नापजोख हो चुकी है।
वहीं, पहले चरण में कंपनी ने कल्याणपुर से बिल्हौर के बीच पोल भी लगा दिए हैं। जानकारों के मुताबिक, डीजल इंजनों की अपेक्षा इलेक्ट्रिक इंजनों में आवाज कम होती है और इनकी देखभाल पर भी कम खर्च आता है। ऐसे इंजनों में सफाई अधिक रहती है पर धुएं और दुर्गंध नहीं रहती है। पहाड़ी क्षेत्रों में ब्रेक पद्धति सबसे कारगर है।
तीन चरणों में बिछेगी लाइन
कन्नौज। पहले चरण में कल्याणपुर से फर्रुखाबाद 178 किलोमीटर तक ओएचई लाइन बिछाई जाएगी। दूसरे चरण में फर्रुखाबाद से कासगंज 56 किलोमीटर और तीसरे चरण में कासगंज से मथुरा 108 किलोमीटर तक रेल लाइन का विद्युतीकरण किया जाएगा। नवंबर 2018 तक काम पूरा कर लाइन चालू करने की योजना है।
खर्च में आएगी कमी, रेलवे को फायदा
कन्नौज। डीजल इंजन में भी प्रति किलोमीटर का एवरेज ट्रेन के लोड के मुताबिक तय होता है। अगर ट्रेन 24 डिब्बे की है तो लगभग 6 लीटर डीजल में एक किलोमीटर का एवरेज आता हैं। जानकारों की माने तो 12 डिब्बों की पैसेंजर गाड़ी है तो उसमें भी एक किलोमीटर का एवरेज 6 लीटर डीजल ही आएगा। पैसेंजर गाड़ी हर स्टेशन पर रुकते हुए चलती है। इस वजह से इसके ब्रेक लगने और स्पीड बढ़ाने में ज्यादा डीजल खर्च होता है। वहीं एक्सप्रेस गाड़ियों की बात करें तो उनमें भी लगभग 4.50 लीटर में एक किलोमीटर का एवरेज आता है। एक्सप्रेस ट्रेन, पैसेंजर ट्रेन की तुलना में बहुत कम जगह रुकती है। डीजल इंजनों की जगह इलेक्ट्रिक इंजन लगने से रेलवे को इस रूट पर करीब 30 फीसदी का कम खर्च आएगा। इससे मुनाफा भी बढ़ेगा।