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भक्ति के लिए आयु नहीं शुद्ध भाव की आवश्यकता : अतुल शास्त्री

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-फोटो 61 : कथा का सुमिरन कराते कथा व्यास अतुल कृष्ण शास्त्री। स्रोत समिति
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बहादुरगढ़। मुख्य बाजार स्थित सनातन धर्म महावीर मंदिर में परोपकारी सभा की ओर से आयोजित 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का चौथा दिन रहा। वृंदावन से पधारे कथा व्यास अतुल कृष्ण शास्त्री महाराज ने प्रहलाद चरित्र, वामन अवतार, श्रीराम जन्म और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंगों का वर्णन किया।
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अतुल कृष्ण शास्त्री ने भक्त प्रहलाद के चरित्र पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भक्ति के लिए आयु की नहीं, बल्कि शुद्ध भाव की आवश्यकता होती है। हिरण्यकश्यप के अहंकार और अत्याचारों के बीच नन्हे प्रह्लाद का अडिग विश्वास हमें सिखाता है कि यदि परमात्मा पर अटूट भरोसा हो तो खंभा फाड़कर भी भगवान नरसिंह अपने भक्त की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं।
प्रह्लाद केवल एक पात्र नहीं, बल्कि अटूट विश्वास का प्रतीक है। वामन अवतार की कथा सुनाते हुए कथा व्यास ने बताया कि भगवान ने किस प्रकार लघु रूप धारण कर राजा बलि के अहंकार को दूर किया और तीन पग में त्रिलोक नाप लिया।
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यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सर्वस्व दान करने वाले भक्त के तो स्वयं भगवान भी ऋणी हो जाते हैं और उसके द्वारपाल बनना स्वीकार कर लेते हैं। कथा में श्रीराम जन्मोत्सव और श्रीकृष्ण जन्म के प्रसंग सुनाते हुए समझाया कि राम मर्यादा सिखाते हैं और कृष्ण प्रेम और आनंद।
श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा की और भजन गाकर खुशियां मनाई। परोपकारी सभा श्री सनातन धर्म महावीर मंदिर के प्रधान जगदीश ऐलावाधी ने बताया कि ऐसी कथाओं के आयोजन से नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति और संस्कारों का रोपण होता है। जब युवा प्रह्लाद और राम जैसे आदर्शों को सुनते हैं तो समाज में नैतिकता का उत्थान होता है।
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