रविवार शाम जब बादल फटा तो तारावती की बहु और पोता मकान के भीतर ही फंस गए थे। गांव के लोगों ने खिड़की तोड़ कर इन्हें बाहर निकाला। ग्रामीणों ने बताया कि अभी भी उनके कानों में कल शाम बादल फटने के बाद आए सैलाब की गर्जना गूंज रही है।
बादल फटने के कारण जंझेड़ गांव नाले में तब्दील हो गया है। खेत खलियान सब तबाह हो गए हैं। गांव के नौ परिवार इस प्राकृतिक आपदा का ज्यादा शिकार हुए हैं। पानी की तेज धारा ने गांव सड़क को उखाड़ दिया है।
बिजली के पोल और तारें धराशायी हो गए हैं, जिसके कारण बिजली गूल है। पानी की पाइपें टूट कर मलबे में गायब हो गई हैं। घटना के 18 घंटे बाद भी घरों से मलबा निकालने का काम पूरा नहीं हो पाया है।
प्राकृतिक आपदा ने बेजुबान जानवरों को अपना ग्रास बनाया। नौ बकरियां, तीन गाय और एक भैंस इस तबाही का शिकार हुई। हालांकि जिला प्रशासन के हरकत में आने के बाद सभी महकमे जनजीवन सामान्य बनाने के प्रयासों में जुट गए हैं।
एसडीएम शिमला ग्रामीण अनिल शर्मा ने कहा कि जंझेड़ गांव के नौ प्रभावित परिवारों को एक लाख रुपये नगद राहत राशि बांटी गई है। पानी की आपूर्ति और सड़क की बहाली का काम पूरा हो गया है।
प्रभावित परिवारों के रहने और खाने पीने की व्यवस्था प्रशासन की ओर से कर दी गई है। ऐसी आपदा दोबारा न हो इसके लिए नाले में क्रेट वॉल लगाने की व्यवस्था करने के आदेश संबंधित बीडीओ को दिए गए हैं।
जंझेड़ में बादल फटने की घटना से करीब 60 लाख रुपये की क्षति का अनुमान लगाया गया है। घटना में तारावती और रूप सिंह के घरों को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। घटना में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ लेकिन पशुधन की हानि हुई है। एक व्यक्ति को हल्की चोटें आई थी जिसे फर्स्ट एड दिया गया। खेतों में लगी गेहूं और जौ की फसल तबाह हो गई है।
प्रभावितों को बांटी राहत राशि
तारावती 15000
रूप सिंह 20000
विजय सिंह 10000
चंद्र सिंह 10000
धनीराम 5000
ठाकुर सिंह 15000
हरीश 5000
भवानी दास 15000
शीला 5000
जिला प्रशासन के आदेशों पर लोक निर्माण विभाग ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। लोक निर्माण विभाग ने सड़क बहाली, आईपीएच ने पानी की व्यवस्था और बिजली विभाग ने विद्युत आपूर्ति बहाल करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के ऊपर जंगलों में बीते दिनों आग लगी थी, जिससे बहुमूल्य वन संपदा का व्यापक नुकसान हुआ था। पेड़ और वनस्पति जल जाने के कारण बाढ़ के साथ आई मिट्टी पत्थर और चिट्टाने ढलान में बह कर सीधे गांव में पहुंच गई और गांव नाले में तब्दील हो गया।
अगर जंगल में आग न लगी होती तो पेड़ों और वनस्पति से पानी का बहाव कम हो सकता था और शायद इतना नुकसान न होता। जंझेड़ में बादल फटने के कारण रविवार शाम डीजीपीआर की धामी-बसंतपुर-किंगल सड़क पर आवाजाही ठप हो गई।
मलबा और पत्थर आने के कारण वाहनों की आवाजाही नहीं हो पाई जिससे साथ लगती छह पंचायतों का संपर्क राजधानी से टूट गया। हालांकि सामरिक महत्व की इस सड़क को सोमवार सुबह बहाल करवा दिया।