केंद्र सरकार की तरफ से लॉकडाउन तीन की घोषणा होने के बाद अब दिल्ली सरकार नए सिरे से योजना तैयार कर रही है। दिल्ली सरकार की असल दिक्कत इसके सभी 11 जिलों के रेड जोन में शामिल होने की है। ऐसे में गाइड लाइन के हिसाब से सारी पाबंदियां पहले जैसी लागू होनी होंगी।
फिर भी, सूत्रों का कहना है कि दिल्ली सरकार जिलों के माइक्रो लेवल पर योजना तैयार कर रही है। इसके हिसाब से दिल्ली के जिलों को रेड, आंरेंज व ग्रीन जोन में बांटा जा सकता है। इसके बाद दिल्ली में केंद्र सरकार की तरफ से तय छूटों को दिल्ली में लागू किया जाएगा।
हालांकि, वरिष्ठï अधिकारियों का कहना है कि सरकार अभी हर संभव विकल्प पर काम कर रही है। तीन मई तक सारी पाबंदियां पूर्ववत रहेंगी। इस बीच दिल्ली सरकार विस्तृत स्तर पर कार्ययोजना तैयार कर लेगी। इसके आधार पर दिल्ली में अगले पंद्रह दिनों तक लॉकडाउन के प्रावधानों व छूटों को पालन करेगी।
दरअसल, चार मई से अगले 15 दिनों तक लागू होने वाले लॉकडाउन तीन के लिहाज से पूरी दिल्ली रेड जोन में आती है। ऐसे में दिल्लीवालों को इस दौरान कोई खास छूट मिलती नहीं दिख रही है। एक वरिष्ठï अधिकारी ने बताया कि बावजूद इसके उत्तर पूर्वी समेत दूसरे दिल्ली के दूसरे जिलों में ऐसे बहुत से इलाके हैं, जहां कोरोना वायरस के संक्रमण का कोई मामला नहीं आया है।
लेकिन जिले के कुछ एक हॉट स्पॉट की वजह से उसे रेड जोन में डाल दिया गया है। ऐसे में सरकार नए सिरे से जिलों के अंदर ऑरेट व ग्रीन जोन में डालने की योजना पर काम कर रही है।
इसके लिए सरकार माइक्रो लेवल पर जिलों का प्रबंधन करेगी। इसका निर्धारण होने के बाद दिल्ली में केंद्र के दिशा निर्देशों के मुताबिक ग्रीन जोन, आंरेंज जोन और रेड जोन की छूट मिल सकती है। तीन मई तक पूरा प्लान फाइनल हो जाएगा।
रेड जोन में भी दिल्ली को मिलेगी फौरी राहत, मगर राज्य सरकार लेगी फैसला
-निजी दफ्तर खोलने की मंजूरी मिलेगी लेकिन एक समय में 33 फीसदी कर्मचारी ही काम करेंगे।
-एसईजेड में जरूरी सेवाओं की फैक्ट्रियों के अलावा जूट व हार्डवेयर की कंपनियां चलाने की मंजूरी होगी।
-निर्माण काम को मिलेगी मंजूरी, लेकिन मजदूरों को निर्माण स्थल पर रखने का करना होगा इंतजाम। मेडिकल जांच जरूरी।
-जरूरी सेवाएं की दुकानें पहले की तरह खुलेगी। रिहायशी इलाकों में जरूरी व गैर जरूरी दुकान खुलेगी मगर अकेली दुकान का होना अनिवार्य है। . -सरकारी दफ्तर में ए ग्रेड के लोग 100 फीसदी और बाकी स्टाफ 33 फीसदी की क्षमता के साथ काम कर सकते हैं।