विंध्याचल मंदिर में भक्तों की भीड़
गुड़हल, कमल व गुलाब के पुष्पाें से आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी देवी का भव्य श्रृंगार। घंटा-घड़ियाल, शंख, नगाड़ा एवं शहनाई की गूंज से गुंजायमान होता विंध्यधाम। देश के कोने-कोेने से आए श्रद्धालुओं से पटी विंध्य की साताें गलियां। विंध्याचल मंदिर की छत पर मुंडन-जनेऊ संस्कार कराते लोग। यह नजारा चैत्र नवरात्र की सप्तमी तिथि पर विंध्याचल के नवरात्र मेले में देखने को मिली।
सोमवार की भोर में जगत जननी मां विंध्यवासिनी देवी के भव्य मंगला आरती होने के पूर्व ही विंध्यधाम व मंदिर के आसपास की सभी गलियां भक्ताें से ठसाठस भर गई थीं। मां की भव्य आरती उपरांत मंदिर में दर्शन-पूजन का सिलसिला आरंभ हो गया, जो अनवरत चलता रहा। गंगा स्नान करने के बाद माला-फूल, नारियल-चुनरी, रोरी-रक्षा, धूपबत्ती-कपूर बाती लेकर श्रद्धालु जयकारा लगाते हुए माता के धाम पहुंचे।
विंध्य दरबार पहुंचने पर मां का तरह-तरह के पुष्पों व स्वर्ण आभूषणों से किया गया भव्य श्रृंगार दर्शन कर श्रद्धालु भावविह्वल हो उठे। मंदिर पहुंचने के बाद किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भगृह में पहुंचकर मां के दिव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर के गुंबद व हवन-कुंड की परिक्रमा करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा, वहीं विंध्याचल के गंगा घाटाें पर स्नान-ध्यान करने के लिए स्नानार्थियाें का रेला लगा रहा। विंध्याचल मंदिर पहुंचने के बाद दूरदराज से आए श्रद्धालु मां की एक झलक पाने को लालायित दिखाई दिए।
मां के मंदिर की तरह-तरह के फूल-पत्तियों, चुनरी एवं रंग-बिरंगे झालरों से की गई सजावट एक अलौकिक छटा बिखेर रही थी। धाम क्षेत्र के न्यू वीआईपी रोड व पुरानी वीआईपी रोड सहित कोतवाली गली, पक्काघाट गली, जैपुरिया गली, बच्चा पाठक गली में भक्ताें की लंबी कतार लगी रही। कतार में खड़े श्रद्धालु मां का जयकारा लगाते मंदिर की तरफ बढ़े जा रहे थे। मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस-पीएसी के जवानाें सहित स्काउट-गाइड पूरी मुस्तैदी श्री विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारी डटे रहे।