दर्शन सिंह 50 साल पहले अमेरिका गए थे।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
कहते हैं कड़ी मेहनत का कोई तोड़ नहीं होता। कुछ ऐसी ही कहानी है अमरीका के दर्शन सिंह धालीवाल की। वे 50 साल पहले भारत से अमेरिका गए थे और आज वहां के शीर्ष बिजनेसमैन में उनका नाम शुमार है। इंदौर में हो रहे प्रवासी भारतीय सम्मेलन में मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनका सम्मान करेंगी। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि एक समय वे छोटे मोटे काम करके अपनी पढ़ाई का खर्च निकालते थे। तभी उन्होंने यह सोच लिया था कि जब वे सफल बनेंगे तो जरूरतमंद बच्चों को जरूर पढ़ाएंगे। आज दर्शन सिंह कई स्कॉलरशिप प्रोग्राम चला रहे हैं और अनेकों बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
अमेरिकी कहते थे झोपड़ी वाले देश से आए हो
दर्शन सिंह ने बताया कि जब वे अमेरिका गए तो वहां के लोग भारत के बारे में कुछ भी नहीं जानते थे। अब 50 साल के बाद इतना बदलाव आ चुका है कि वही लोग भारत आने के लिए बेताब रहते हैं। उन्होंने बताया कि वहां के लोग कहते थे कि सुना है भारत में लोग पेड़ पर झोपड़ी बनाकर रहते हैं।
वेयर हाउस में काम किया, फिर खुद का बिजनेस खोला
दर्शन सिंह ने बताया कि उन्होंने चार साल तक वेयर हाउस में काम किया फिर खुद का बिजनेस शुरू किया। वे युवाओं से कहते हैं कि कड़ी मेहनत का कोई तोड़ नहीं होता और एक दिन भगवान जरूर इसका फल देता है। आज दर्शन सिंह का अमेरिका में रियल स्टेट, गैस स्टेशन का कारोबार है। उनकी सालाना कमाई दो अरब डॉलर से अधिक है। उनके पास अमेरिका में एक हजार से अधिक पेट्रोल स्टेशन हैं।
भारत में कृषि क्षेत्र में करना है काम
दर्शन सिंह भारत में कृषि क्षेत्र पर काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा भारत की जनसंख्या बहुत है और लोगों को घरों में किचन गार्डन जैसी पद्धतियों के बारे में सिखाना चाहिए। इसमें रसायनों का कम प्रयोग होता है और बहुत कम पानी और जगह में घर के लिए पर्याप्त सब्जी हो जाती है। लोगों को जैविक की ओर जाना चाहिए।