राहुल गांधी के साथ अखिलेश यादव रोड शो के दौरान (फाइल फोटो)
आजकल सिर्फ दो ही मुद्दों पर चर्चा हो रही है। एक मुद्दा प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बयान और दूसरा महाराजपुर विधानसभा में चल रही खींचतान।
इन चर्चाओं के दौरान शहर के कांग्रेसियों के बदले नजरिए की झलक मिलती है। बैठकों में शामिल अधिकतर कांग्रेसियों का मानना है कि प्रदेश में कांग्रेस-सपा की सरकार बनने पर ही गठबंधन आगे बढ़ेगा।
बीते दिनों सीएम अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ गठबंधन को मजबूरी के कारण हुआ गठबंधन बताया था। इसके बाद महाराजपुर में कांग्रेस प्रत्याशी राजाराम पाल और सपा प्रत्याशी अरुणा तोमर ने एक-दूसरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। इन दोनों मामलों के चलते पहले से ही गठबंधन के विरोध में रहे कांग्रेसियों का मानना है कि सत्ता के लिए यह मिलन हुआ है।
यदि सत्ता नहीं मिली तो इसका आगे बढ़ना मुश्किल है। गठबंधन के कारण चुनाव लड़ने से वंचित रहे पार्टी पदाधिकारी भी इसी मौके की ताक में बैठे हैं। सपा में भी यही स्थिति है।
कांग्रेस महानगर अध्यक्ष हरप्रकाश अग्निहोत्री के मुताबिक आलाकमान के निर्देशों के मुताबिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने गठबंधन धर्म निभाते हुए दोनों दलों के संयुक्त प्रत्याशियों को विधानसभा सीट के मुताबिक चुनाव लड़वाया है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी सोच के लिहाज से बयान दिया है। कांग्रेसी भविष्य में भी आलाकमान के दिशा-निर्देशों के मुताबिक काम करेंगे। कांग्रेस पार्टी महाराजपुर में दोबारा मतदान की मांग कर रही है।