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पंजाबः सीएम अमरिंदर सिंह के साथ बैठक में विधायकों ने मंत्रियों के रवैये पर उठाए सवाल

Tue, 22 Jan 2019 12:09 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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Capt Amarinder Singh - फोटो : ANI
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करीब दो साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पहली बार अपने विधायकों संग बैठकें कीं तो विधायकों ने उनके सामने शिकायतों का अंबार लगा दिए। हालांकि मुख्यमंत्री ने यह बैठकें आगामी बजट की तैयारी के मद्देनजर विधायकों से उनके हलकों की समस्याएं और जरूरतें जानने के लिए बुलाई थीं लेकिन लगभग सभी विधायकों की दो शिकायतें समान थीं कि उन्हें अपने हलके के विकास कार्यों के लिए समय पर फंड नहीं मिल रहा और अफसर भी उनकी बात नहीं सुनते।

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मालवा, माझा और दोआबा क्षेत्र के कांग्रेस विधायकों की चार दिन चलीं बैठकों में पहले दिन से ही माहौल अलग तरह का रहा। मुख्यमंत्री जहां विभिन्न विकास योजनाओं के लिए फंड का एलान कर रहे थे, वहीं विधायक बार-बार अपनी शिकायतें उनके सामने रखते रहे। इसी के चलते मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों को उनके हलके के लिए 5-5 करोड़ रुपये का विकास फंड जारी करने का एलान भी किया, जबकि विधायकों की मांग इस राशि को एमएलए लेड फंड के तहत दिए जाने की थी।

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सीएम अमरिंदर सिंह - फोटो : File Photo
इन बैठकों में मौजूद कैबिनेट मंत्रियों को भी विधायकों ने निशाने पर लेते हुए उनके सामने ही मुख्यमंत्री से उनकी शिकायतें कीं। कुछ विधायकों का कहना था कि मंत्री ही उनकी बात नहीं सुनते तो अफसर क्या सुनेंगे? विधायकों का कहना था कि सचिवालय पहुंचने पर अनेक बार ऐसा हुआ है कि मंत्री ने उनसे बात भी नहीं की। कुछ विधायकों ने तो यहां तक कहा कि मंत्री खुद को इतना बड़ा मानने लगे हैं कि विधायकों से हाथ मिलाने में भी गुरेज करते हैं।

 मंत्रियों के सामने ही मिल रही इन शिकायतों पर ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री को भी कई बार मंत्रियों से कहना पड़ा कि वे अपना व्यवहार बदलें और विधायकों की बातों पर ध्यान दें। दूसरी ओर, सरकारी अफसरों द्वारा विधायकों को तवज्जों नहीं दिए जाने की शिकायत का हल उक्त बैठकों में नहीं निकल सका। वैसे मुख्यमंत्री ने विधायकों को यह भरोसा दिलाया कि इस संबंध में जल्दी ही कड़े कदम उठाए जाएंगे। 

उल्लेखनीय है कि किसी भी विधायक के अपने हलके में पहुंचने पर वहां तैनात अफसर संबंधित विधायक की अगुवाई करेंगे, इस बारे में एक प्रस्ताव सरकार के पास अटका है, जिस पर अंतिम फैसला लिया जाना अभी बाकी है।
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