इन बैठकों में मौजूद कैबिनेट मंत्रियों को भी विधायकों ने निशाने पर लेते हुए उनके सामने ही मुख्यमंत्री से उनकी शिकायतें कीं। कुछ विधायकों का कहना था कि मंत्री ही उनकी बात नहीं सुनते तो अफसर क्या सुनेंगे? विधायकों का कहना था कि सचिवालय पहुंचने पर अनेक बार ऐसा हुआ है कि मंत्री ने उनसे बात भी नहीं की। कुछ विधायकों ने तो यहां तक कहा कि मंत्री खुद को इतना बड़ा मानने लगे हैं कि विधायकों से हाथ मिलाने में भी गुरेज करते हैं।
मंत्रियों के सामने ही मिल रही इन शिकायतों पर ध्यान देते हुए मुख्यमंत्री को भी कई बार मंत्रियों से कहना पड़ा कि वे अपना व्यवहार बदलें और विधायकों की बातों पर ध्यान दें। दूसरी ओर, सरकारी अफसरों द्वारा विधायकों को तवज्जों नहीं दिए जाने की शिकायत का हल उक्त बैठकों में नहीं निकल सका। वैसे मुख्यमंत्री ने विधायकों को यह भरोसा दिलाया कि इस संबंध में जल्दी ही कड़े कदम उठाए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि किसी भी विधायक के अपने हलके में पहुंचने पर वहां तैनात अफसर संबंधित विधायक की अगुवाई करेंगे, इस बारे में एक प्रस्ताव सरकार के पास अटका है, जिस पर अंतिम फैसला लिया जाना अभी बाकी है।