अपने मर्मस्पर्शी शब्दों से अटल जी ने सबको अपना मुरीद बनाया। सत्ता के गलियारों से लेकर गांव गली मुहल्ले तक हर शख्स अटल जी की वाकपटुता का कायल रहा है। दिल्ली के एम्स में अटल बिहारी वाजपेयी ने 93 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। अटल जी ने राजनीति पर कुछ ऐसे वाक्य कहे हैं जोकि राजनीति की पाठशाला का काम करेंगे। जानिए अटल जी द्वारा राजनीति पर कहे गए शब्द...
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
आज की राजनीति विवेक नहीं, वाक्- चातुर्य चाहती है, संयम नहीं, श्रेय नहीं, प्रेय के पीछे पागल है। मतभेद का समादर करना तो अलग रहा, उसको सहन करने की वृत्ति भी विलुप्त हो रही है।
आगे की स्लाइड में- आदर्शवाद का स्थान अवसरवाद ले रहा है
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
आदर्शवाद का स्थान अवसरवाद ले रहा है। बायें (लेफ्ट) और दायें (राइट) का भेद भी व्यक्तिगत अधिक है, विचारगत कम।
आगे की स्लाइड में- सब अपनी-अपनी गोटी लाल करने में लगे हैं
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
सब अपनी-अपनी गोटी लाल करने में लगे हैं, उत्तराधिकारी की शतरंज पर मोहरे बैठाने की चिंता में लीन हैं।
आगे की स्लाइड में-निर्भीकता और स्पष्टवादिता खतरे से खाली नहीं है..
सत्ता का संघर्ष प्रतिपक्षियों से ही नहीं, स्वयं अपने ही दल वालों से हो रहा है। पद और प्रतिष्ठा को कायम करने के लिए जोड़-तोड़, सांठ-गांठ और ठकुरसुहाती आवश्यक है। निर्भीकता और स्पष्टवादिता खतरे से खाली नहीं है। आत्मा को कुचलकर ही आगे बढ़ा जा सकता है।