चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन और गोल्फ क्लब के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद आखिरकार सुलझ गया है। चंडीगढ़ प्रशासन लंबी जद्दोजहद के बाद गोल्फ क्लब का किराया कम करने को तैयार हो गया है। सूत्रों के अनुसार प्रशासन क्लब का किराया 3 लाख रुपये प्रति माह कम करने पर सहमत हो गया है। ऐसे में क्लब के सालाना किराए में 36 लाख रुपये की कमी हो जाएगी। गोल्फ क्लब ने भी इस पर अपनी सहमति जता दी है। ऐसे में क्लब का सालाना किराया अब 1.54 करोड़ रुपये (12.8 लाख प्रति माह) से कम होकर 1.08 करोड़ रुपये सालाना हो जाएगा। प्रशासन की ओर से जल्द ही इस संबंध में हाईकोर्ट में भी जानकारी दे दी जाएगी। प्रशासन की ओर से क्लब को अपना बकाया जमा करने के लिए एक साल का समय दिया जाएगा।
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर लीज मनी विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थ नियुक्त किए गए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस कुलदीप सिंह ने प्रशासन के अधिकारियों और गोल्फ क्लब के पदाधिकारियों के साथ कई बैठकें की थीं। जस्टिस कुलदीप सिंह ने दोनों पक्षों को सुना और इस विवाद को सुलझाने के प्रयास किए। अब इस विवाद को सुलझाने के बाद जस्टिस कुलदीप सिंह हाईकोर्ट में इस बारे में रिपोर्ट पेश करेंगे।
लीज मनी खारिज करने की थी मांग
चंडीगढ़ गोल्फ क्लब की तरफ से हाईकोर्ट में दायर याचिका में चंडीगढ़ प्रशासन की न्यू लीज डीड ऑफर को खारिज करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया कि था कि 16 मार्च 2008 से 15 मार्च 2013 के दौरान पांच सालों की अवधि के लिए प्रशासन ने क्लब से 9.27 करोड़ रुपये बकाया लीज मनी मांगी है। याचिका में कहा गया था कि लीज मनी की गणना गलत ढंग से की गई है। ऐसे में इस फैसले पर रोक लगाई जाए। इसके अलावा एमएचए के पास भी यह मुद्दा उठा था।