चंडीगढ़। शिक्षा विभाग में 2009 में हुई 536 शिक्षकों की भरती पर संकट के बादल छा गए हैं। नियमों की अनदेखी करने पर तीन साल बाद कैट के आदेश पर अब दो अभ्यर्थियों को विभाग ने सरकारी स्कूलों में नियुक्ति दी है। इन नियुक्तियों के लिए विभाग ने तीन साल से नौकरी कर रहे दो शिक्षकों की छुट्टी कर दी। इस पर हटाई गई टीचर कैट में चली गई है, जिस पर 8 जनवरी को सुनवाई होगी। अब मेरिट लिस्ट में जगह नहीं बना पाने वाले कई और अभ्यर्थी कैट जाने की तैयारी में हैं।
2009 में 536 शिक्षकों की भरती में 2007 भरती रूल्स का विज्ञापन दिया गया। भरती नियमों के तहत शिक्षकों की फाइल मेरिट लिस्ट बनाते हुए स्क्रीनिंग टेस्ट के अंक नहीं जोड़े जाने थे, लेकिन नियुक्तियों में इसकी अनदेखी की गई। इस मामलेे को लेकर ओबीसी कैटेगरी के तहत कैंडीडेट रमिंदरजीत कौर ने कैट का दरवाजा खटखटा दिया। कैट ने मामले की जांच के बाद रमिंदरजीत की आपत्तियों को सही ठहराया। कैट के आदेश पर शिक्षा विभाग ने रमिंदरजीत कौर को स्कूल में ज्वाइनिंग दे दी। इसी केस के आधार पर एक अन्य टीजीटी एसएस कैंडीडेट शालू चावला ने भी कैट में मामला दायर कर दिया। शिक्षा विभाग ने रमिंदरजीत कौर को जीएमएसएसएस-15 और शालू चावला को जीएमएचएस-38 में ज्वाइन करा दिया। उधर, विभाग ने सेक्टर-46 स्कूल में तैनात शिक्षक अशोक यादव और एसएस शिक्षिका अर्पणा को नौकरी से हटा दिया। इस मामले के बाद अर्पणा ने शिक्षा विभाग के फैसले के खिलाफ कैट में याचिका दायर की है, जिस पर 8 जनवरी को सुनवाई होगी।
शिक्षकों में मची अफरातफरी
शिक्षा विभाग द्वारा कैट के आदेश के बाद दो शिक्षकों की ज्वाइनिंग और दो को नौकरी से हटाने के बाद 2009 भरती में चुने गए सभी 536 शिक्षकों की धड़कनें बढ़ गई हैं। पूरी मेरिट लिस्ट पर अब सवालिया निशान लग गए हैं। मामले के बाद शुक्रवार दोपहर बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन के आला अधिकारियों की इस मामले पर अहम बैठक हुई है। शिक्षकों को डर है कि मामला बढ़ने पर भरती ही रद न हो जाए। इस वजह से उनमें खलबली मची हुई है।
सीबीआई भी कर रही जांच
536 शिक्षकों की भरती को लेकर पूर्व डीपीआई (स्कूल) समवर्तक सिंह का नाम भी आ चुका है। यह मामला सीबीआई दिल्ली के पास चल रहा है। दो महीने पहले ही भरती से संबंधित अभ्यर्थियों के रिकार्ड की सेक्टर-22 गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में जांच हुई थी। समवर्तक सिंह से भी सीबीआई कई बार पूछताछ कर चुकी है।
वर्जन
पुराने शिक्षकों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। यूनियन तीन साल से काम कर रहे शिक्षकों को नहीं निकलने देगी। अधिकारी अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसे कदम उठा रहे हैं।
- स्वर्ण सिंह कंबोज, प्रेसीडेंट, यूटी कैडर एम्प्लाइज यूनियन
कोट्स
मामला कैट में विचाराधीन है। मैं इस मामले में अभी कोई कमेंट नहीं कर सकता।
- उपकार सिंह (डीपीआई स्कूल)