चंडीगढ़। इंफोसिस के एग्जीक्यूटिव को-चेयरमैन एस गोपालाकृष्णन ने कहा कि चंडीगढ़ के आईटी पार्क स्थित कंपनी के कैंपस की विकास दर इंफोसिस के हर कैंपस से बेहतर है। यहां छह हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं और यह सबसे तेजी से विकसित हो रहा है। इस संख्या को दोगुना करने की प्लानिंग कंपनी कर रही है। चंडीगढ़ कैंपस से ही कुल 26 प्रतिशत सॉफ्टवेयर का निर्यात हुआ है।
गोपालाकृष्णन के संबोधन के बाद जब इस आईटी कान्क्लेव के मुख्य अतिथि पंजाब के खाद्य एवं आपूर्ति तथा आईटी मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों ने मंच संभाला तो उन्होंने गोपालाकृष्णन से कहा कि उनके पास आए दिन पुणे और बंगलूरू स्थित इंफोसिस कैंपस में काम करने वाले कर्मचारियों की चंडीगढ़ कैंपस में तबादला कराने की सिफारिश आती है। इससे यह स्पष्ट है कि इंफोसिस के चंडीगढ़ कैंपस में काम करने की चाहत हर किसी की है। ऐसे में इंफोसिस को पंजाब में अपना कैंपस शुरू करना चाहिए।
पंजाब में आ सकती है इंफोसिस
देश की नामी आईटी कंपनी इंफोसिस पंजाब में भी अपना विस्तार कर सकती है। पंजाब के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों ने कंपनी को पंजाब आने का न्यौता दिया। साथ ही सस्ती जमीन और अन्य रियायतें उपलब्ध कराने का भी वादा किया। इस पर इंफोसिस के एस गोपालाकृष्णन ने कहा कि कंपनी विस्तार की योजना पर काम कर रही है। भविष्य में पंजाब का भी रुख हो सकता है।
2020 तक 2.5 लाख नौकरियां
गोपालाकृष्णन ने कहा कि जिस तरह से बीपीओ का काम चल रहा है उससे वर्ष 2020 तक ढाई लाख नौकरियों के और आसार हैं। आईटी कंपनियों ने डिवाइस और साफ्टवेयर में जिस तरह से तरक्की की है उससे कंप्यूटर की कीमतों में कमी आई है। इसकी कास्टिंग कम होती जा रही है। आकाश-2 टैबलेट ने पहले ही क्रांति ला दी है और अब मोबाइल में स्टोरेज क्षमता के साथ ही सेवाएं भी बढ़ेंगी। उन्हाेंने बताया कि आईटी और आईईएस इंडस्ट्री का अब तक रेवेन्यू सौ अरब डालर है और वर्ष 2020 तक यह तीन सौ अरब डालर हो जाएगा।