किसान नेता का आरोप है कि आज प्रदेश में केवल 10 फीसदी गरीब किसानों को इस योजना का लाभ मिल पा रहा है। बाकि जिस प्रकार वेयरहाउस योजना में सब्सिडी डकार कर बड़े-बड़े लोग लाभ उठाते हैं उसी प्रकार कस्टम हायरिंग योजना में भी अपनी जुगाड़ बैठाकर राजनेता, बड़े अफसर, बड़े व्यापारी और उनके करीबी लोग इस योजना में मिलने वाली सब्सिडी का लाभ उठाते है और अंतिम पंक्ति में खड़ा किसान, जिसके लिए ये योजना लाई गई वो इधर-उधर से उधार लेकर अपनी खेती करता रहता है और कर्ज में दबाता रहता है।
उन्होंने आगे कहा, आज इस योजना की मध्यप्रदेश में निष्पक्ष तरीके से जांच करवाई जाएं तो कई बड़े नेताओं से लेकर अधिकारी और प्रभावशाली लोगों के पास इसी योजना के तहत ट्रैक्टर और अन्य कृषि यंत्र मिलेंगे। जिनका उन्होंने कभी भी गरीब किसानों का लाभ नहीं होने दिया।
राहुल राज ने कृषि मंत्री कमल पटेल से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए ये प्रश्न खड़े किए कि क्या प्रदेश के कृषि मंत्री ये आंकड़े सार्वजनिक कर सकते हैं कि कितने किसानों को इस योजना के तहत कम दरों पर कृषि मिले और कहां-कहां मिले। क्योंकि अभी हमने यही देखा है कि राज्य में सरकार किसी भी दल की रहे बस एक की नारे है कि किसानों के नाम पर खूब जमकर लूटो।
ये है कस्टम हायरिंग योजना
कस्टम हायरिंग योजना एक ऐसी स्कीम है जिनमें आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को कम दरों पर किराए पर कृषि यंत्र खेती के लिए उपलब्ध करवाए जाते हैं। इस योजना में एक एजेंसी के जरिए सक्षम किसान द्वारा आवेदन किया जाता है। लॉटरी सिस्टम के तहत किसान के नाम का चयन किया जाता है। चयनित किसानों को 40 फीसदी तक की सब्सिडी कृषि यंत्रों की खरीद के लिए दी जाती है। चुने हुए किसानों को पांच दिनों की ट्रेनिंग सरकार देती है। इसके बाद सक्षम किसान अपने अपने क्षेत्रों में गरीब किसानों की सहायता के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करते हैं। जहां से गरीब किसान मामूली दरों कृषि यंत्र किराए पर लेते है।