खनिज विभाग के अधिकारी मीनाक्षी साहू ने कहा, 'शिकायत मिली है, क्योंकि अनुमति हमने दी है इसलिए उसे देखकर कार्रवाई की जाएगी नहीं तो फिर सारा विषय हमारे ऊपर आ जाएगा।' वहीं, भाजपा ने भी इस मामले पर जांच की मांग की है कि आखिर भरी बरसात में जलाशय खोदने की अनुमति किसने और क्यों दी। खनिज अधिकारी मीनाक्षी साहू ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने सिंचाई विभाग से अनुमति ली थी।
जलाशय के बीचों बीच खोदाई
दरअसल, खोदाई करने की अनुमति जलाशय की बाहर की थी, लेकिन ठेकेदार द्वारा जलाशय के अंदर ही मुख्य टैंक स्थल पर मुरुम का खनन किया जा रहा है। सैंकड़ों ट्रिप मुरुम वहां से निकाल लिया गया है और सिंचाई विभाग द्वारा कुछ दिन पहले भी ठेकेदार को वहां खोदाई करने से मना किया गया था, लेकिन उसने बात नहीं मानी और जलाशय के बीचो-बीच खोदाई कर दी। इस मामले में सिंचाई विभाग के उपअभियंता विशाल राठौर ने बताया कि जब हम जलाशय में काम करवाते हैं तो हम अपने हिसाब से करते हैं, उनके द्वारा जलाशय के मध्य को अवैध रूप से खनन करते हुए बिगाड़ने का काम किया गया है, जिसको लेकर नोटिस भी जारी किया जाएगा।
जलाशय में खनन की अनुमति आखिर कैसे?
जलाशय सिंचाई विभाग का कहना है कि खनन की अनुमति यहां पर खनिज विभाग ने दे दी। आखिर यह करिश्मा बालोद जिले में कैसे हो गया, यह भी एक बड़ा सवाल है। पूरे मामले में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता राकेश यादव ने कहा कि यहां पर खनिज संसाधनों का बेतहाशा दोहन हो रहा है और इतने बड़े जलाशय को बारिश के दिनों में कैसे खोदने की अनुमति दे दी गई। अनुमति किसने दी है, यह भी जांच का विषय है। जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के ऊपर उचित कार्रवाई होनी चाहिए।
चैन माउंटेन की अनुमति नहीं
यहां पर मुरुम खनन के लिए किसी तरह की चैन माउंटेन से खोदाई की अनुमति नहीं है। बावजूद इसके ठेकेदार गोपाल रथी द्वारा वहां पर जलाशय के मुख्य टैंक स्थल पर जैन माउंटेन लगाकर मुरुम का खनन किया जा रहा था, जिसे रोकने के लिए सिंचाई विभाग की टीम पहुंची और उनके द्वारा रिपोर्ट तैयार की जा रही है। अब देखना यह होगा की कार्रवाई खनिज विभाग द्वारा की जाती है या फिर सिंचाई विभाग द्वारा।