छात्रावासों में कार्यरत ऐसे कर्मचारी जिनकी मार्कशीट को लेकर संशय था। उनको भर्ती दिखाकर सहायक आयुक्त ने नियमित कर दिया। इसकी पोल छात्रावास अधीक्षक संघ ने खोलते हुए आयुक्त अजाक विभाग और कलेक्टर को शिकायत दी है। अजाक विभाग में चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों की भर्ती से लेकर नियमित करने तक की प्रक्रिया में पूरा खेल खेला गया है। इसमें शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली तो संदेह के घेरे में है ही साथ ही साथ अजाक विभाग के सहायक आयुक्त पर भी इसको लेकर गंभीर आरोप लग रहे हैं। इसकी लिखित शिकायत कलेक्टर और अजाक विभाग के आयुक्त की गई है।
वर्ष 2012-13 में अजाक विभाग में चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों के लिए करीब 500 पदों पर भर्ती होनी थी। जिसमें करीब 250 आवेदनों की मार्कशीट डुप्लीकेट दी गई थी। इतनी अधिक संख्या में डुप्लीकेट मार्कशीट देख तत्कालीन सहायक आयुक्त बीके राजपूत ने दस्तावेजों का रेंडमली सत्यापन कराया तो पता चला कि जिनका सत्यापन कराया गया है। उसमें कई मार्कशीट फर्जी हैं। जिसके बाद ऐसी करीब 246 मार्कशीट का सत्यापन कराने के लिए शिक्षा विभाग को भेजी गई। लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इसका सत्यापन नहीं किया।
इसके बाद किसी तरह से उक्त अभ्यर्थी छात्रावास औक अन्य जगह काम करते रहे। इस मामले में किसी भी सहायक आयुक्त ने दोबारा सत्यापन कराने के लिए संबंधित विभाग को न तो पत्र लिखा न ही शिक्षा विभाग ने सत्यापन रिपोर्ट भेजी। मामले को वहीं दबा दिया गया। इसके बाद कुछ समय पूर्व जब नियमित करने की बात आई तो वर्तमान सहायक आयुक्त ने उक्त कर्मचारियों को नियमित कर दिया। जिन कर्मचारियों के दस्तावेजों का सत्यापन करना चाहिए था। उनको सीधे नियमित कर दिया गया। इसमें कई तो ऐसे भी हैं जो कि ड्यूटी ही नहीं करते थे। लेकिन इनको भी नियिमत कर दिया गया। हांलाकि, बाद में इस मामले में शिकायत होने के बाद पुराने तारीख में उपस्थिति दर्ज कराने की बात सामने आ रही है। इसकी भी छात्रावास अधीक्षक संघ ने लिखित में शिकायत की है।
गरियाबंद में अजाक विभाग में 90 अपात्र चतुर्थ वर्ग कर्मचारी को नियमित करने का मामला सामने आया था, जो कि विधानसभा में उठने के बाद सहायक आयुक्त को निलंबित कर दिया गया। लेकिन यहां तो करीब 246 लोगों के दस्तावेजों का सत्यापन करने के बजाए नियमित कर दिया गया है। लेकिन कार्रवाई यहां अब तक कुछ नहीं हुई है। अजाक विभाग में सहायक आयुक्त अविनाश श्रीवास ने कहा कि मुझ पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह से गलत हैं। कुछ लोगों द्वारा पहले भी शिकायत की गई थी। जिसमें जांच की गई है।