छत पर डंडा लेकर बंदरों को भगाता ग्रामीण।
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छत्तीसगढ़ के धमतरी में बंदरों का उत्पात जारी है। लोगों के घरों में घुसकर सामानों की तोड़फोड़ करने के साथ ही फसलों और बाड़ी को तहस-नहस कर रहे हैं। सड़क चलते राहगीरों पर हमला कर देते हैं। इसे लेकर ग्रामीणों ने कई बार वन विभाग से शिकायत भी की। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके चलते अब ग्रामीण खुद ही डंडे लेकर छतों पर पहरेदारी कर बंदरों को भगाने में जुटे हैं।
दरअसल मगरलोड क्षेत्र के ग्रामों में बंदर करीब चार-पांच साल से लोगों को परेशान कर रहे हैं, लेकिन उनका यह उत्पात अब बढ़ गया है। अब बंदर लोगों के घरों के अंदर तक पहुंचने लगे हैँ। घर में रखे सामान को तोड़ देते हैं। छतों पर फैले कपड़े उठा ले जाते हैं तो चादरों को फाड़ रहे हैं। घरों में बनी बाड़ियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। फल-सब्जी सब चौपट होने के चलते लोगों का गुस्सा भी अब भड़कने लगा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के डर से छत पर कपड़े फैलाना और सामान रखना तक छोड़ दिया है। कच्चे घरों की छतों को बंदरों तोड़-फोड़ कर रहे हैं। खाने-पीने के सामान बिखेर देते हैं। बंदरों के झुंड के झुंड घरों पर चढ़ जाते हैं और उत्पात मचाते हैं। इनके चलते हमें घर के दरवाजे और खिड़की तक बंद कर के रखना पड़ता है। हमने वन विभाग से भी बंदरों को खदेड़ने की मांग की है, पर सुनवाई नहीं हुई।
वहीं धमतरी वन मंडल के एसडीओ टीआर वर्मा का कहना है कि बंदरो से नुकसान को लेकर मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। न ही बंदरो को भगाने के लिए प्रवधान है। ऐसे में गांव वाले खुद आपस में बैठकर तय कर लें और गुलेल के माध्यम से उन्हें भगाते रहें। इस इलाके में हाथियों का भी उत्पात है। अब बंदरों के भी आ जाने से लोगों के लिए मुसीबत बढ़ गई है। इसके समाधान के लिए चौकीदारी जारी है।