छत्तीसगढ़ में शुरू हुई गोधन न्याय योजना अब लोगों का जीवन स्तर में भी सुधार ला रही है। प्रदेश के नवगठित जिले मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) के पशुपालक संतोष सिंह गोबर बेचकर अपने बेटे आलोक को डॉक्टर बना रहे हैं। पहले NEET की कोचिंग कराई। फिर MBBS में चयन होने पर उसकी फीस का भी भुगतान भी गोबर बेचकर मिले रुपयों से किया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी आलोक को फोन कर उसके चयन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
नीट की तैयारी के लिए कोटा भेजा
MCB जिले में मनेंद्रगढ़ ब्लॉक के ग्राम आमाखेखा निवासी संतोष सिंह किसान होने के साथ-साथ पशुपालक भी हैं। उनके बेटे आलोक सिंह का चयन MBBS में हुआ है। इसके बाद कांकेर मेडिकल कॉलेज में उसका दाखिला कराया गया है। इसके लिए गोधन न्याय योजना के तहत संतोष सिंह ने गोबर बेचा। उससे मिले रुपयों से NEET की कोचिंग कराने उन्होंने आलोक को कोटा भेजा। आलोक ने भी मेहनत की और NEET पास कर MBBS में चयनित हुआ।
3.25 लाख रुपये का बेचा गोबर
संतोष सिंह बताते हैं कि वे हमेशा से अपने बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन आठ सदस्यीय परिवार का पालन-पोषण करना ही मुश्किल था। उसमें बेटे की पढ़ाई पर भी खर्च हो रहा था। ऐसे में जब छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना की शुरुआत हुई तो उन्हें सहारा मिला। संतोष सिंह बताते हैं कि उनके पास 40 मवेशी हैं। उनके गोबर बेचकर आलोक को कोचिंग कराई और पढ़ाई पर खर्च किया। संतोष सिंह ने बताया कि उन्होंने तीन लाख 25 हजार रुपये का गोबर बेचा है।
CM ने कहा-ये सीजी मॉडल
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने फोन कर आलोक को बधाई दी है। उन्होंने इसे लेकर ट्वीट भी किया है। मुख्यमंत्री बघेल ने लिखा कि, 'न्याय' का नया श्लोक, डॉक्टर बनेगा आलोक। छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना की सफलता का दायरा दिनों-दिन बढ़ता जा है। MCB के संतोष सिंह ने गोबर बेचकर मिले पैसों से अपने बेटे आलोक को NEET की कोचिंग कराई और कांकेर मेडिकल कॉलेज में चयन होने पर फीस भी जमा की। ये सीजी मॉडल है।