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सोचा न था कि मौत घात लगाए बैठी है

Sun, 26 May 2013 01:24 AM IST
बस्तर सीधे दरभा घाटी से
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शनिवार की दोपहर सभी के चेहरों पर संतुष्टि का भाव था। हो भी क्यों न, राज्य में परिवर्तन यात्रा का चौथा चरण भी सफलतापूर्वक पूरा हो गया था। आम सभा के बाद सभी ने साथ में खाना खाया और थोड़ा सुस्ताकर वापसी के लिए रवाना हो गए।
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मगर शायद इन कांग्रेसी नेताओं ने सपने में भी नहीं सोचा था कि सुकमा जिले की दरभा घाटी में मौत उनका घात लगाकर इंतजार कर रही है।

कांग्रेसी काफिले के साथ चल रहे मीडियाकर्मियों ने मौत का जो तांडव देखा, उसे बयान करने में उनकी भी रुह कांप गई। उनके अनुसार चारों तरफ बस मौत ही मौत थी।

अंधाधुंध फायरिंग के बीच कुछ दिखाई तो नहीं दे रहा था। लेकिन लोगों की चीख पुकार की आवाजें कानों में गर्म सीसे की तरह जरूरत जा रही थी।

करीब दो घंटे की अंधाधुंध फायरिंग के बाद जो नजारा सामने आया, वह तो और भी ज्यादा हृदय विदारक था। चारों तरफ शव बिखरे पड़े थे। जो घायल थे, उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने वाला भी कोई नहीं था।

चारों तरफ बस अफरातफरी का माहौल। जो दम तोड़ चुके थे, उनके शव क्षत विक्षत पड़े हुए थे और जो बच गए थे, वो जिंदगी की भीख मांग रहे थे।

स्थानीय ग्रामीण तो इस तांडव को देखकर इतना सहम गए कि बेचारे घर से बाहर निकलने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाए।

पहली गाड़ी को बारूदी सुरंग से उड़ाया
नक्सली दरभा घाटी में घात लगाकर तैयार बैठे थे क्योंकि यह रास्ता बेहद संकरा और चारों तरफ जंगल से घिरा हुआ है।

ऐसे में यह तय था कि कार्यकर्ताओं का भागना लगभग नामुमकिन ही रहेगा। उन्होंने खासतौर पर काफिले में आगे चल रही तीन गाड़ियों को अपना निशाना बनाया।

जैसे ही पहले वाहन ने इस संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश किया, नक्सलियों ने बारूदी सुरंग से उसे उड़ा दिया। पहली गाड़ी के बम से उड़ने के बाद कांग्रेस नेताओं के होश उड़ गए।
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जब तक उन्हें कुछ समझ में आता, तब तक सैकड़ों नक्सलियों ने उन्हें चारों तरफ से घेरकर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद शुरू हो गया मौत का तांडव।

मारने से पहले कराया सरेंडर
कांग्रेस नेता भले ही इसके लिए बिल्कुल तैयार न हों, लेकिन नक्सलियों ने इसके लिए पूरी तैयारी कर रखी थी। महेंद्र कर्मा को सरकार की ओर से जेड प्लस सिक्योरिटी मिली हुई थी। इसलिए शुरुआती घंटे में तो दोनों ओर से फायरिंग हुई।

नक्सलियों ने छिपकर अंधाधुंध फायरिंग की और सुरक्षाकर्मियों की गोलियां खत्म होने का इंतजार किया। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस नेताओं को सरेंडर करने को कहा और इनमें से महेंद्र कर्मा को ढूंढकर बेहद बेरहमी से कत्ल कर दिया।

पीएसओ ने खुद को मारी गोली
महेंद्र कर्मा की सुरक्षा करने में असफल उनके एक सुरक्षाकर्मी ने खुद को गोली मार ली। हालांकि मरने से पहले उसने अंतिम क्षण तक नक्सलियों से लोहा लिया, लेकिन हजारों की संख्या में मौजूद नक्सलियों के सामने उसका टिकना लगभग असंभव ही था।

पारंपरिक हथियारों के साथ भी थे मौजूद
पूरी सेना की तरह दिखाई दे रहे नक्सलियों के पास न सिर्फ आधुनिक हथियार थे बल्कि तीर कमान और बरछी जैसे पारंपरिक हथियार भी थे। इन हथियारों के साथ वह मौत बनकर टूट पड़े थे।

नहीं पहुंच पाई पुलिस
हमले के घंटों बाद भी पुलिस घटनास्थल पर नहीं पहुंच सकी। इसी कारण घायलों को सहायता भी समय पर नहीं मिल सकी। हालांकि दरभा थाने में पुलिस की कई टीमें इकठ्ठा हो चुकी थी।

बदले की भावना से तो नहीं किया हमला
स्थानीय मीडियाकर्मियों की मानें तो नक्सलियों का यह हमला बदले की भावना से भी प्रेरित हो सकता है। कुछ ही दिन पहले बीजापुर में सीआरपीएफ की कार्रवाई में आठ लोग मारे गए थे, जिनमें कथित तौर पर बच्चे भी शामिल थे।

इसी के विरोध में नक्सलियों ने 26 मई को बंद का भी आह्वान किया था। उन्होंने मुख्य सड़क पर बैनर और प्रेस नोट जारी कर यह चेतावनी दी थी। इसके अलावा वह भाजपा की विकास यात्रा और कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर भी विरोध जताया था।
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(घटनास्थल पर मौजूद मीडियाकर्मियों से बातचीत के आधार पर)
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