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रमन सरकार की फांस बन गया है 'नान' घोटाला

Mon, 16 Mar 2015 01:57 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला
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छत्तीसगढ़ का नान (नागरिक आपूर्ति निगम) घोटाला सीएम रमन सिंह सरकार के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। ‘नान घोटाले’ से जुड़ी एक डायरी में दो मंत्रियों, एक पूर्व मंत्री सहित कई अधिकारियों के नाम आने के बाद सरकार घिरती जा रही है। विपक्ष ने इस मामले में जल्द सीबीआई जांच की मांग की है।
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तो वहीं छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार मामले में फंसे प्रदेश के नौकरशाह और मंत्रियों पर एक्शन लेने से बच रही है। प्रदेश भाजपा का कहना है कि यह इतना बड़ा घोटाला नहीं है कि जिसकी सीबीआई जांच की जाए। इस मामले में अभी तक नौ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम सेक्शन ई के तहत मामला दर्ज किया गया है।

नान घोटाले के आरोपों में घिरे इन अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज कर नोटिस जारी किया गया है। पिछले दिनों सामने आए इस घोटाले में छापेमारी के दौरान नान के कई अधिकारियों के ठिकानों से करीब सात करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की गई थी।
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छापा तो मारा लेकिन अब कार्रवाई क्यों नहीं?

ईओडब्ल्यू और भ्रष्टाचार निवारक ब्यूरो की टीम ने बारह फरवरी को नागरिक आपूर्ति निगम के कई अफसरों और कर्मचारियों के ठिकानों पर छापेमारी कर सात करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त कर इस घोटाले का पर्दाफाश किया था। लेकिन इस मामले में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से सरकार पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांण्डे ने इस मामले में सरकार के तीन मंत्री और पांच अफसरों के लिप्त होने का भी आरोप लगाया है। तो वहीं ईओडब्ल्यू पर भी घोटाले से जुड़े दस्तावेजों में हेरा-फेरी का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया है कि जांच की हेरा-फेरी को लेकर उनके पास पुख्ता सबूत हैं और वे इस मामले को लेकर कोर्ट जाएंगे।

बीजेपी नहीं मानती इसे बड़ा घोटाला

छत्तीसगढ़ के ‘नान घोटाले’ से जुड़ी एक डायरी में दो मंत्रियों, एक पूर्व मंत्री सहित कई अधिकारियों के नाम आने के बाद विपक्ष ने बुधवार को विधानसभा में जमकर हंगामा किया था, और मामले से जुड़ी डायरी को सदन में उछाला। विपक्ष ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है।

सत्तारूढ़ भाजपा ने सरकार के बचाव में आकर कांग्रेस की इस मांग को खारिज कर दिया था। छत्तीसगढ़ भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्रीचंद सुंदरानी का कहना था कि यह इतना बड़ा घोटला नहीं है जिसकी कि सीबीआई जांच की जाए। भाजपा का कहना था कि सरकार के पास जांच के लिए प्रर्याप्त साधन हैं।

ये है नान घोटाला

ईओडब्ल्यू और भ्रष्टाचार निवारक ब्यूरो की टीमों ने बीती 12 फरवरी को नागरिक आपूर्ति अफसरों और कर्मचरियों के करीब 28 ठिकानों पर छापेमारी कर 3.5 करोड़ कैश और मामले से जुड़े कई अहम दस्तावेज जब्त किए थे।

छापेमारी में अवंति विहार स्थित नान मुख्यालय की जांच के दौरान कथित तौर पर एक डायरी मिली, जिसमें कमीशन लेने वालों के नाम दर्ज हैं। इस डायरी में एक पूर्व मंत्री सहित दो वर्तमान मंत्रियों के नामों का उल्लेख किया गया है।

इसके अलावा एक प्रमुख सचिव, एक सचिव और तीन बड़े अफसरों सहित दो अन्य नेताओं से करोड़ों रुपये के लेन-देन का जिक्र है। कथित डायरी के अनुसार, एक प्रमुख सचिव और डायरेक्टर भी नान अधिकारियों से पैसे लिया करते थे। डायरी में मंत्रियों के नाम कोड वर्ड में लिखे गए हैं।
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इनके खिलाफ हुआ मामला दर्ज

नान घोटाले के आरोपों में घिरे अधिकारी -कर्मचारियों में से अभी तक नौ अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम सेक्‍शन ई के तहत मामला दर्ज किया गया है।

नान घोटाले में शिवशंकर भट्ट, क्षीरसागर पटेल, ए के यदु, डी के शर्मा, जी के खेतान, आर पी पाठक, देवेन्द्र सिंह कुशवाहा, संदीप अग्रवाल और आर एन सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
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