राज्य में सबसे ज्यादा गन्ना उत्पादन कबीरधाम जिले में होता है। यहां हर साल करीब 35 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती की जाती है। यही कारण है कि गन्ना पेराई सीजन के दौरान जिले में दो सहकारी शक्कर कारखाना व 300 से अधिक गुड़ फैक्टरी संचालित होती हैं। गन्ना की पेराई हर साल नवंबर माह से लेकर मार्च माह तक होती है। इस बार निजी गुड़ फैक्टरी संचालन को लेकर जिला प्रशासन की नजर रहेगी।
इन फैक्टरी को सरकार के नियम अनुसार संचालित किया जाएगा। इसे देखते हुए कार्यालय जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, भिलाई एवं जिले के निजी गुड़ फैक्टरी मालिक के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में पर्यावरण संरक्षण मंडल के नियमों व दिशा निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी गई। पर्यावरण अनापत्ति की ऑनलाइन प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई।
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र डीएल पुसाम ने बताया कि गुड़ फैक्टरी स्थापना के पूर्व आवश्यक प्रक्रिया जैसे भूमि का औद्योगिक प्रयोजन के लिए डायवर्जन, स्थानीय निकाय का अनापत्ति, औद्योगिक विद्युत कनेक्शन तथा इकाई स्थापना उपरांत जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र से उत्पादन प्रमाण पत्र, पर्यावरण संरक्षण से संबंधित नियमों का पालन करते हुए पर्यावरण संरक्षण मंडल से अनापत्ति प्रमाण पत्र, इकाई स्थल पर चिमनी का निर्धारित मापदंड अनुसार निर्माण किया जाना, इकाई स्थल पर बाल श्रमिक कार्यरत नही होने संबंधी सूचना पटल, श्रमिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय तथा श्रम नियमों का पालन व फैक्टरी लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है।
इसके साथ ही बाहर से आए श्रमिकों का पुलिस सत्यापन तथा एफएसएसएआई लाइसेंस प्राप्त किया जाना आवश्यक है। इस साल आने वाले नए सीजन में फैक्टरी प्रारंभ करने के पूर्व उपरोक्त आवश्यक नियमों का पालन किया जाना अनिवार्य होगा। बता दें कि कबीरधाम जिले की अधिकांश गुड़ फैक्टरी शासन के नियम अनुसार संचालित नहीं होती हैं। यहां कार्य के दौरान लापरवाही की जाती है। बीते कुछ साल में इन फैक्टरी में काम के दौरान हादसे में पांच मजदूरों की मौत हो गई थी। इन फैक्टरी में ज्यादातर मजदूर उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के होते हैं। बढ़ते हादसे को देखते हुए इस साल अभी से ही गुड़ फैक्टरी के ऊपर प्रशासन की पैनी नजर है।