आगामी लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर कांग्रेस पार्टी ने भी प्रत्याशियों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। कांग्रेस ने पहली सूची में 39 उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के छह सीटों पर प्रदेश के दिग्गज नेताओं को प्रत्याशी चुना है। जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट से शिवकुमार डहरिया को उम्मीदवार बनाया गया है। बता दें कि जांजगीर लोकसभा सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। पूर्व मंत्री शिवकुमार डहरिया एससी समाज से ही आते हैं। माना जा रहा है कि इस सीट में कांग्रेस की मजबूत पकड़ है। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए छत्तीसगढ़ की सभी सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर चुकी है।
पूर्व मंत्री शिवकुमार डहरिया ने अपनी राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र नेता के रूप में की थी। स्कूल और कॉलेज में छात्र संघ के नेता के रूप में चुने गए। इसके बाद में राजनीतिक कैरियर में निरंतर आगे बढ़ते गए। शिवकुमार 1990 में मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति एवं जनजाति प्रकोष्ठ के संयुक्त मंत्री रहे। इसके बाद 1997 में प्रदेश युवा कांग्रेस के महामंत्री रहे।
जानें शिवकुमार डहरिया की राजनीतिक सफर
शिवकुमार डहरिया राजनीतिक सफर में लगातार आगे बढ़ते गए और साल 2000 में उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा मिला। मध्य प्रदेश में राज्य परिवहन प्राधिकरण के सदस्य बने। मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ अलग होने के बाद 2001 में छत्तीसगढ़ प्रदेश कमेटी के प्रभारी महामंत्री भी रहे। शिवकुमार डहरिया साल 2003 में पहली बार विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। 2004 में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के कल्याण संबंधी समिति पटल पर देखे गए पत्रों का निरीक्षण करने संबंधित समिति का सदस्य भी रहे। इसके बाद 2018 में तीसरी बार विधायक बने।
मंत्री भी रह चुके हैं डहरिया
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सत्ता वापस आने के बाद मंत्री पद के लिए चुने गए। भूपेश बघेल की कैबिनेट में शिवकुमार डहरिया नगरीय प्रशासन मंत्री रहे। इसके अलावा कई विभागों में उन्होंने जिम्मेदारी संभाले। साल 2023 में एक बार फिर शिवकुमार डहरिया को आरंग विधानसभा सीट से टिकट दिया गया था। वहीं भाजपा ने इस सीट से सतनामी समाज के गुरु खुशवंत साहेब को टिकट दिया था। वहीं इस सीट से भाजपा प्रत्याशी गुरु खुशवंत साहेब को जीत मिली। लिहाजा 2023 विधानसभा चुनाव में शिवकुमार डहरिया को हार का सामना करना पड़ा।
शिवकुमार डहरिया का क्षेत्र बदला
बता दें कि पूर्व मंत्री शिवकुमार डहरिया एससी समाज के दिग्गज नेता हैं। वही जांजगीर लोकसभा सीट एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। जातिगत समीकरण के आधार पर और पूर्व मंत्री रहने की वजह से शिवकुमार डहरिया को एससी आरक्षित सीट से चुनाव लड़ाया जा रहा है। शिवकुमार डहरिया आरंग विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं। पहली बार लोकसभा चुनाव के लिए उनके क्षेत्र बदला गया है।
जानें जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट की हार-जीत
इस बार साल 2024 का लोकसभा चुनाव में जांजगीर चांपा लोकसभा सीट काफी अहम माना जा रहा है। क्योंकि साल 2009 और 2014 में दो बार भाजपा से कमला देवी पाटले सांसद रह चुकी हैं। वहीं साल 2009 में कांग्रेस से डॉ. शिव कुमार डहरिया ने चुनाव लडा था। जिसमें 2 लाख 14 हजार 931 वोट मिले थे,जिसमें उन्हें हार का सामान करना पड़ा था। भाजपा प्रत्याशी रहे कमला देवी पाटले ने जीत दर्ज की थी। इसी प्रकार से 2014 में कांग्रेस ने प्रेम चंद जायसी को चुनाव मैदान में उतारा था। वही भाजपा ने फिर से कमला देवी पाटले को चुनाव मैदान में उतारा जिसका परिणाम स्वरूप कांग्रेस प्रत्याशी प्रेम चंद जायसी को चुनाव में 3 लाख 43 हजार 948 वोट मिला था, भाजपा प्रत्याशी कमला देवी पाटले को 5 लाख 18 हजार 909 वोट मिला था। इस तरह से 2014 में भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। साल 2019 लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस पार्टी से रवि भारद्वाज और भाजपा पार्टी से गुहाराम अजगले चुनाव मैदान में था, जिसमें कांग्रेस से रवि भारद्वाज को 4लाख 89 हजार 535 वोट मिले और भाजपा प्रत्याशी गुहाराम अजगले को 5 लाख 72 हजार 790 वोट मिला था। फिर से कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था। जांजगीर चांपा लोकसभा सीट में लगातार 3 बार भाजपा पार्टी के झोली में जा गिरी। वहीं अगर वोट प्रतिशत की बात करें, तो तीनों बार कांग्रेस पार्टी की वोट में वृद्धि हुई है।
दोनों उम्मीदवारों में रहेगी काटे की टक्कर
इस बार साल 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के दोनों उम्मीदवारों के बीच काटे का टक्कर देखने को मिला सकता है। क्यूंकि भाजपा पार्टी ने पुराने चेहरे में फेर बदल किया है। इस बार नए चेहरे के रूप में कमलेश जांगड़े को चुनाव मैदान में उतारा है, तो कांग्रेस पार्टी ने पूर्व मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया को टिकट दी है। क्योंकि 2009 में भी चुनाव लड़ चुके है मगर हार का सामना करना पड़ा था। यदि विधानसभा की बात करे, तो जांजगीर-चांपा लोक सभा में 8 विधानसभा आते हैं, जिसमें कांग्रेस के विधायक हैं। इस नजर से देखें, तो कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी को इसका लाभ मिला सकता है। वहीं भाजपा के एक भी विधायक आठ विधानसभा नही हैं। भाजपा प्रत्याशी कमलेश जांगड़े को कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। ऐसा इस लिए क्योंकि वर्तमान में भाजपा सांसद गुहाराम अजगले की क्षेत्र में सक्रिय नहीं होने का एक बड़ा कारण हो सकता है। चर्चा है कि भाजपा के कार्यकर्ता भी सांसद के कामकाज से संतुष्ट नहीं है। यह एक कड़ी टक्कर होने का कारण हो सकता है। वहीं दोनों उम्मीदवारों के बीच काटे की टक्कर होगी।