ईश्वरी ने बताया कि जब तक वो जिंदा रहेगी तब तक मां की आराधना में डूबी रहेगी और हर वर्ष नवरात्र में मां की पूजा अर्चनाकर नौ दिनों तक पूजा पाठ करती रहेंगी। ताकि घर परिवार और गांव में सुख शांति बनी रहे।
इस सम्बंध में ईश्वरीय चौहान ने बताया कि एक वर्ष पूर्व से पत्नी के सपने में छोटी बच्ची दिखाई पड़ रही थी, जो पूजा करने के लिऐ प्रेरित कर रही थी। इसकी जानकारी वे अपने पति को देती है और पूजा पाठ करने की बात कहती है। फिर नवरात्रि से पूजा-पाठ करने की इच्छा बढ़ गई। तब पुनः एक सफेद साड़ी में महिला आकर रूद्राक्ष की माला से जोर-जोर आवाज से जाप करने लगी।
कील का बिछावन दिखा। जब सुबह उठी तो वह मंत्र व सपना पूरी तरह याद रहा। इस सपने की सारी बात उन्होंने पति को बताई और कील ठोककर बाजवट तैयार किया गया। इसके बाद तीन माह से रुद्राक्ष माला एवं सपने में सुने मंत्र को जपने लगी। उन्होंने पूरे नौ दिनों तक अन्न, जल, फल न खाने-पीने का प्रण लिया है।