कोरबा जिले के पाली विकासखंड के दो गांव डायरिया की चपेट में आ गए हैं। यहां पर लगभग 30 लोग प्रभावित हुए हैं सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है। मौके पर कैंप करने के साथ दूसरे स्तर पर प्रभावित लोगों की सुद्ध ली जा रही है।
कोरबा जिले के पाली विकासखंड के दो गांव डायरिया की चपेट में आ गए हैं। यहां पर लगभग 30 लोग प्रभावित हुए हैं सूचना के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है। मौके पर कैंप करने के साथ दूसरे स्तर पर प्रभावित लोगों की सुद्ध ली जा रही है।
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बारिश के मौसम में कई प्रकार की चुनौतियां जिले में बनी हुई है। जल जनित बीमारियां उत्पन्न होने से इसका सीधा असर जनजीवन पर पड़ रहा है।। प्राप्त सूचनाओं में बताया गया कि खैराडुबान के दौरीकलारी और चैतमा में भलवामुड़ा गांव में लगभग 40 लोग डायरिया से प्रभावित हुए हैं । एक ग्रामीण ने बताया कि पेचिश की शिकायत कई लोगों को है। गांव में प्रत्येक घर में लोग पीड़ित है। जिन का उपचार चल रहा है स्वास्थ्य विभाग की टीम के द्वारा आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग को इस मामले में जानकारी मिली तो उसने फौरी तौर पर आवश्यक कदम उठाए । मैदानी अमले को गांव में कैंप करने के निर्देश दिए गए ताकि प्रभावित लोगों को राहत मिल सके। स्वास्थ्य कर्मचारी ने बताया कि प्रभावित में से कई मरीजों को बेहतर स्थिति में ले आया गया है।। कई मरीजों को स्टेबल करने के बाद अन्य स्थिति में रेफर करने की कार्रवाई की जा रही है।
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विकासखंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अनिल सराफ ने बताया कि खैर दुलारी गांव में डायरिया की शिकायत के बाद फौरन कार्रवाई की गई 16 में से नौ लोगों को ठीक कर लिया गया है। चेतन में भी कुछ लोगों के पीड़ित होने की जानकारी मिली है। एक स्थान पर गंदगी जमा होने और उसके नजदीक से ही पानी की आपूर्ति होने को मौजूदा समस्या के पीछे जिम्मेदार माना जा रहा है ।इस बात को ध्यान में रखते हुए कनेक्शन को कटवा दिया गया है। पाली स्वास्थ्य केंद्र में क्षमता से अधिक लोगों को भर्ती किया गया वहीं वार्ड में बेड खाली नहीं होने के कारण बाहर बरामदे में भी भर्ती किया गया है जिनकी हालत ज्यादा गंभीर है उनसे जिला मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया गया है
मौजूदा सीजन में अलग-अलग कारण से मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है और ऐसी स्थिति में सरकारी अस्पतालों में मरीज का दबाव काफी बढ़ गया है। क्षमता से ज्यादा मरीज के यहां पहुंचने से अब उन्हें एडमिट करने के लिए बरामदे का उपयोग करना पड़ रहा है । स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता किसी भी कीमत पर पीड़ितों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की है।