डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री विजय शर्मा के प्रयासों और उनके सार्थक पहल से कबीरधाम जिले दो ग्रामीण श्रमिक युवक शशिकांत यादव और गंगाप्रसाद परस्ते को जिला प्रशासन की टीम ने कर्नाटक के धारवाड़ से सुरक्षित वापस लाई है। ये दोनों ग्रामीण युवक के माता-पिता तथा उनके परिजनों ने अपने बेटे की गांव वापसी के लिए डिप्टी सीएम एवं कवर्धा विधायक से मदद मांगी थी। उपमुख्यमंत्री ने पूरी संवेदनशीलता से मामले को संज्ञान में लिया था और कबीरधाम जिले के इन दोनों श्रमिकों की सकुशल वापसी के लिए कलेक्टर जनमेजय महोबे से चर्चा कर कर्नाटक टीम भेजने के निर्देश दिए।
कलेक्टर के निर्देश पर इन दोनों श्रमिकों के लोकेशन की जानकारी लेने के लिए जिला साइबर सेल की मदद ली। श्रमिकों के ठहरने की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन द्वारा प्रशासनिक, श्रम विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम बनाकर कर्नाटक के लिए रवाना हुए।
कलेक्टर महोबे ने बताया कि कबीरधाम जिले के शशिकांत यादव पिता महापति यादव और गंगाप्रसाद परस्ते पिता मातवर परस्ते निवासी ग्राम बांकी ग्राम पंचायत केसमर्दा थाना तरेगांव विकासखण्ड बोड़ला के रहने वाले है। ये दोनों श्रमिक माता-पिता और उनके अभिभावकों ने बताया था कि ये दोनों कर्नाटक कमाने खाने गए थे। वहां पर वे किसी कम्पनी में गन्ना कटाई का काम करते थे। उनको वहां से कहीं भी आने -जाने नहीं दिया जा रहा था।श्रम पदाधिकारी कवर्धा एवं धारवाड़ कर्नाटक राज्य के प्रशासन एवं श्रम विभाग के साथ सामंजस्य स्थापित कर तत्काल उक्त दोनों श्रमिकों को मुक्त करवाने के लिए टीम गठित की गई।
कबीरधाम जिले से गठित टीम को आठ जनवरी को कवर्धा से कर्नाटक के लिए रवाना किया गया था। दोनों श्रमिकों को 12 जनवरी को देर रात कवर्धा लाया गया। कबीरधाम लौटने पर श्रमिकों ने बताया कि गांव के एक युवक ने इन दोनों को अच्छा काम दिलाने का ख्वाब देकर नागपुर के गए और वहां से धोखे से कर्नाटक ले गए, कर्नाटक के धारवाड़ में गन्ना कटाई का काम कराते थे। खेतों में बने झोपड़ी में ठहराया और मजदूरी भी कम मिलती थी।
इधर, कलेक्टर महोबे ने ग्रामीण युवकों को अच्छे काम दिलाने के बहाने, बहला-फुसलाकर बाहर ले जाने वाले एजेंटों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। श्रमिक को उनकी पारिश्रमिक 32 हजार रुपए नगद भुगतान भी कराया गया। दोनों श्रमिकों को उनके अभिभावक को सौंप दिया गया।