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Janjgir Champa: महाशिवरात्रि पर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजे शिवालय, जलाभिषेक करने के लिए भक्तों की लगी कतार

Fri, 08 Mar 2024 04:33 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, जांजगीर चांपा

सार

जांजगीर चांपा जिले के तीन प्रमुख मंदिरों में महाशिवरात्रि में विशेष तैयारी की गई है लाखों की संख्या में श्रद्धालु भोले बाबा के पास मनोकामना लेकर पहुंच रहे हैं, छत्तीसगढ़ के अद्भुत शिव मंदिर, दर्शन मात्र से बीमारियों और दुखों से मिलती राहत है। 
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जलाभिषेक के लिए भक्तों का लगा तांता - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में महाशिवरात्रि के अवसर पर पीथमपुर में बाबा कालेश्वर नाथ, नवागढ़ में बाबा लिंगेश्वर और खरौद में बाबा लक्ष्मणेश्वर मंदिरों में सुबह चार बजे से ही भक्तों की लंबी कतार जल अभिषेक करने के लिए उमड़ी हुई है। हर-हर महादेव के नारे से पूरा शिवालय गूंज उठा है। पीथमपुर में बाबा कालेश्वरनाथ 400 सालों से मौजूद हैं। नवागढ़ में बाबा लिंगेश्वर की उत्पत्ति धरती माता की गोद से हुई है, जिनका आकर बढ़ रहा है। वही खरौद में विराजित लक्ष्मणेश्वर की स्थापना भगवान लक्ष्मण ने की थी जिसमें सवा लाख छिद्र है।

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जांजगीर चांपा जिले के तीन प्रमुख मंदिरों में महाशिवरात्रि में विशेष तैयारी की गई है लाखों की संख्या में श्रद्धालु भोले बाबा के पास मनोकामना लेकर पहुंच रहे हैं, छत्तीसगढ़ के अद्भुत शिव मंदिर, दर्शन मात्र से बीमारियों और दुखों से मिलती राहत है। 


धार्मिक नगरी खरौद में लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर 

जांजगीर चांपा जिले के खरौद नगर को धार्मिक नगरी के नाम से जाना जाता हैं, खरौद नगर में भगवान शिव का प्रसिध मंदिर है। जिसे लोग लखनेश्वर या लक्ष्मणेश्वर महादेव के नाम से जानते हैं। लखनेश्वर का अर्थ लाखों छिद्र वाला ईश्वर और लक्ष्मणेश्वर का अर्थ होता है- लक्ष्मण का ईश्वर। इस मंदिर में विराजित शिवलिंग में लाखों छिद्र के अंदर कुंड बना हुआ है। जिसमें गंगा, जमुना और सरस्वती नदी का पवित्र जल है। जिसके कारण से पानी कभी कम नहीं होता ना ही सूखता है। माना जाता है कि महादेव की इस मंदिर में पूजा करने से लाखों शिवलिंग की पूजा का फल मिलता है और साथ ही छय रोग से भी मुक्ति मिलती है।

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त्रेतायुग में भगवान लक्ष्मण ने की थी शिवलिंग की स्थापना

खर और दुषण की नगरी के रूप में खरौद नगर को जाना जाता है मान्यता के अनुसार, इस मंदिर के शिवलिंग को त्रेतायुग में स्वयं भगवान लक्ष्मण जी ने स्थापित किया था। जब भगवान राम और रावण के बीच युद्ध के दौरान भगवान लक्ष्मण छय रोग से ग्रसित हो गए थे। तब उन्होंने इसी जगह पर शिवलिंग स्थापित कर महादेव की पूजा की और छय रोग से मुक्ति पाई थी। खरौद नगरी में इस शिवलिंग की पूजा करने हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। हर-हर महादेव के नारे लगाते हुए महादेव पर जल अभिषेक कर रहे हैं।


नवागढ़ में विराजते हैं स्वयं भू लिंगेश्वर महादेव: 

जिला मुख्यालय से 30 किलो मीटर दूर नवागढ़ में बाबा लिंगेश्वर महादेव विराजमान हैं। महाशिवरात्रि के दिन यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इस मंदिर में विराजे बाबा भोलेनाथ की स्वयं भू शिवलिंग बहुत बड़ी है। बाबा लिंगेश्वर महादेव की ऊंचाई जमीन से चार फिट ऊंची है। इस मंदिर की मान्यता है कि शिवलिंग की गहराई का अंत नहीं है। शिवलिंग का रंग साल में दो बार बदलता भी है। यह शिवलिंग सावन में भूरा और गर्मी में काला रंग का दिखता है। सावन में यहां मेला का आयोजन भी किया जाता है। महाशिवरात्रि में सात दिनों का मेला लगता है। यह भी मान्यता है कि इस मंदिर में शिव जी की पूजा करने से सभी मनोकामना पूरी होती है।
 

नवागढ़ में भगवान महादेव लिंगेश्वर का मंदिर है। भगवान लिंगेश्वर  शिवलिंग,सभी शिवलिंगो में सबसे बड़ा और विशाल है।अपनी आकर के अनुरूप ही लिंगेश्वर महादेव की महिमा भी अपार है। इस शिवलिंग का आकार समय के साथ धीरे- धीरे बढ़ते जा रहा है. जो अपने भक्तों की हर समय रक्षा करता है और साथ ही मनोकामना पूरी करते है। इस मंदिर के इतिहास के बारे में तो कोई लिखित जानकारी नहीं मिलती लेकिन इस रहस्मयी शिवलिंग के उत्पत्ति के बारे में ऐसा माना जाता है कि पास में स्थित तालाब के किनारे ही शिवलिंग की उत्पत्ति हुआ है. तबसे ही इस शिवलिंग लिंगेश्वर महादेव के दर्शन करने श्रद्धालु आते है।
 

पीथमपुर में बाबा कलेश्वर नाथ 
जिला मुख्यलय से आठ किलो मीटर दूर हसदेव नदी के तट पर बना प्रसिद्ध शिवालय में एक नाम और भी है, जो पीथमपुर गांव में स्थित है। हसदेव नदी के तट में बाबा कलेश्वर नाथ मंदिर स्थित है। इस प्रसिद्ध शिव मंदिर में सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा अर्चना की जाती है। यहां लोग श्रद्धापूर्वक बाबा कालेश्वर नाथ का अभिषेक करते हैं। 

मान्यता है की इस मंदिर को चार सौ साल से भी अधिक समय से यहां शिवलिंग विराजित है। इस मंदिर को छोटा उज्जैन के नाम से भी जाना जाता है। बाबा कालेश्वर नाथ जी की पूजा करने से पेट संबंधी विकार या रोगों से मुक्ति मिलती है। साथ ही सूनी गोद वाली महिलाओं की गोद भी भर जाती है। और उन्हें संतान प्रप्ति होती है।  मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु जमीन में दंडवत होकर भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।

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