बलरामपुर में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल से अब तक जिले मे सर्पदंश के 141 मामले समने आए हैं जिनमें पांच की मौत हुई है। मानसून में सर्वप्रथम की घटना में वृद्धि हो जाती है वहीं आने वाले समय में बरसात के साथ सर्पदंश की घटनाओं में भी वृद्धि होगी।
बलरामपुर में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल से अब तक जिले मे सर्पदंश के 141 मामले समने आए हैं जिनमें पांच की मौत हुई है। मानसून में सर्वप्रथम की घटना में वृद्धि हो जाती है वहीं आने वाले समय में बरसात के साथ सर्पदंश की घटनाओं में भी वृद्धि होगी। जिले में सबसे अधिक सर्पदंश की घटनाएं बलरामपुर विकासखंड एवं सबसे कम शंकरगढ़ विकासखंड में हुई है।
विज्ञापन
गौरतलब है कि प्रत्येक वर्ष मानसून के समय में सर्पदंश की घटनाओं में एकाएक वृद्धि हो जाती है वहीं सर्पदंश से कई लोगों की मृत्यु झाड फूक के चक्कर में पड़ने के कारण हो जाती है सांप काटने के बाद अस्पताल जाने में लोग जागरूकता के अभाव में देरी कर देते हैं एवं झाड़ फूंक के चक्कर में घंटे गुजार देते हैं जिसके बाद जब वह अस्पताल जाते हैं तो तब तक स्थिति बिगड़ गई रहती है ऐसे में बचना मुश्किल हो जाता है।
जागरूकता के अभाव में लोग बैग गुनिया का सहारा लेते हैं। 1 अप्रैल से अबतक तक बलरामपुर विकासखंड में सर्पदंश की 51 घटना, कुसमी विकासखंड में 14 घटनाएं,राजपुर विकासखंड में 14 घटना, रामानुजगंज विकासखंड में 8 घटना, शंकरगढ़ विकासखंड में तीन घटना एवं वाड्रफनगर विकासखंड में 50 घटनाएं हो चुकी है। जिसमें सांप काटने के बाद अस्पताल समय पर ले जाने के बाद भी 7 लोगों की स्थिति ज्यादा गंभीर होने पर अच्छे उपचार के लिए रेफर किया गया था।सर्पदंश से वाड्रफनगर विकासखंड में 4 लोगों की मृत्यु एवं राजपुर विकासखंड में 1 की मृत्यु हो चुकी है।
विज्ञापन
जिले में सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1 अप्रैल से अब तक पांच लोगों की मृत्यु सांप काटने से हुई है परंतु सरकारी आंकड़ों के अलावा भी कई लोगों की मृत्यु सांप काटने से हुई। सांप काटने के बाद कई तो अस्पताल भी नहीं पहुंच पाए।
सीएमएचओ डॉक्टर बसंत ने बताया कि जिले में 5 हजार से अधिक एंटी वेनम उपलब्ध है। उन्होंने अपील की है कि सांप काटने के बाद झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़े तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र मरीज को ले जाएं एवं चिकित्सा को सूचित करें। उन्होंने बताया कि सर्पदंश के मरीजों के इलाज हेतु जिले के समस्त स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है जिसमें सर्वप्रथम के बचाव हेतु आवश्यक उपचार के संबंध में तथा स्नेक एंटी वेनम के बारे में बताया गया है।