कबीरधाम में उल्टी-दस्त का प्रकोप जारी है। बोड़ला ब्लॉक अंतर्गत झलमला थाना क्षेत्र के नक्सल प्रभावित ग्राम सोनवाही में बीते पांच दिन के भीतर पांच बैगाओं की मौत हो गई है। बैगा जनजाति को राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र का दर्जा प्राप्त है। यह छत्तीसगढ़ की विशेष संरक्षित जनजाति है। इसके चलते राज्य व केंद्र सरकार के द्वारा इनके संरक्षण के लिए भी कई तरह की योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। लेकिन, गांव में बीते पांच दिन से हो रही मौत के संबंध में जिला प्रशासन को कोई जानकारी नहीं है।
खुद ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक व प्रदेश के डिप्टी सीएम विजय शर्मा को जानकारी दी। इसके बाद गुरुवार को गांव में जिला प्रशासन की टीम पहुंची। ग्रामीणों के अनुसार गांव में अब तक पांच लोगों की मौत हुई है। दो लोगों की आज मौत हुई है। बाकि तीन लोगों की मौत बीते दिनों हुई है। जिन लोगों की मौत हुई है, उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत थी। सही समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण उनकी स्थिति बिगड़ती चली गई व मौत हो गई।
वर्तमान में उल्टी-दस्त के करीब 12 मरीजों का उपचार जारी है। मौके पर स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग व पीएचई की मौजूद है। सार्वजनिक पेयजल स्त्रोतों को जल परीक्षण के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) द्वारा पानी का नमूना लिया गया है। अस्थायी हैल्थ कैंप में प्रारंभ किया गया है। इस संबंध में जिला प्रशासन का कहना है कि हाल में दो की मौत हुई है, जिनका पीएम किया जा रहा है। मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। प्रथम दृष्टया मशरूम खाने या पीने के पानी से बीमारी होने का अंदेशा है। बाकि तीन अन्य लोगों की मौत कई दिन पूर्व हो चुकी है, जिनका वर्तमान के घटनाक्रम से कोई वास्ता नहीं है।
बिलासपुर में लगातार अपने पैर पसार डायरिया
बिलासपुर में डायरिया लगातार अपने पैर पसार रहा है। डायरिया से सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र के लोग प्रभावित हो रहे हैं। रतनपुर, मस्तूरी और बिल्हा में डायरिया के 50 से अधिक लोग प्रभावित हैं। रतनपुर, बिल्हा और मस्तूरी क्षेत्र में डायरिया के मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। लोगों में उल्टी-दस्त की समस्या देखी जा रही है, जिससे उनके शरीर में कमजोरी आ रही है।
प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाकर डोर टू डोर सर्वे कर रहे हैं। नेवसा में रहने वाली डायरिया पीड़ित 19 वर्षीय नेहा धीवर का निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था, जहां उसकी मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित इलाकों के 500 से अधिक घरों का सर्वे किया गया है। इस दौरान मरीजों की संख्या में कमी आई, लेकिन डायरिया का प्रकोप थम नहीं सका है।
रतनपुर में 13 नए मरीज और बिल्हा व मस्तूरी इलाके में 17 डायरिया मरीज सामने आए। वहीं 47 लोगों के स्वस्थ होने पर उन्हें हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। डायरिया फैलने का मुख्य कारण यहां के दूषित पानी बताया जा रहा है। यहां के नल कनेक्शन नालियों से होकर गुजरती है, जिसमें पाइप में नाली का गंदा पानी भी आ रहा है। कलेक्टर ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी को तत्काल पाइपलाइन को सुधारने और नगर में सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।