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बचपन का हुनर बना जवानी का सहारा: उल्लूर के दुर्गम मूर्तियां बनाकर कमा रहे रुपये, हर कदम पर साथ देती है पत्नी

Thu, 07 Sep 2023 04:37 PM IST
श्याम जी. अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर

सार

धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र उल्लूर संजय पारा के दुर्गम नागेश भगवान की मूर्तियां बनाकर अपनी जिंदगी सवार रहे हैं। बचपन से सीखा हुआ हुनर अब जाकर पालन-पोषण का सहारा बना है। 
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मूर्ति बनाते हुए दुर्गम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोपालपटनम ब्लॉक के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र उल्लूर संजय पारा के दुर्गम नागेश भगवान की मूर्तियां बनाकर अपनी जिंदगी सवार रहे हैं। बचपन से सीखा हुआ हुनर अब जाकर पालन-पोषण का सहारा बना है। उल्लूर के रहने वाले दुर्गम नागेश बताते हैं कि वे बचपन से मिट्टी से खिलौने बनाकर खेलते थे। उन्हें मिट्टी से चित्रकला बनाने का बड़ा शौक था। 10 साल की उम्र में घर मे गाय, बैल के खिलौने बनाकर अपने दोस्तों के साथ खेलते थे। इसी तरह धीरे-धीरे उन्होंने भगवान की मूर्तियां बनाना शुरू किया। 

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ऐसे बदली तकदीर
दुर्गम नागेश ने बताया कि उनके यहां से गांव के लोग औने-पौने दाम में मूर्तियां ले जाया करते थे। कुछ साल बाद गांव में गणेश बिठाने के लिए उन्हें मूर्ति बनाने को कहा गया। उनका वह पहला ऑर्डर था। उन्होंने गांव के लिए बड़ी मेहनत से मूर्ति बनाई और वे सफल हुए। इसके बाद आसपास के गांव वाले गणेश व दुर्गा उत्साह में उनसे मूर्तियां बनवाने लगे। धीरे-धीरे अब वे तीन साल से ब्लॉक मुख्यालय में आकर मूर्तियां बनाकर बेच रहे हैं।

मूर्ति बनाने के साथ खेती भी करते हैं दुर्गम 
उल्लूर के नागेश क्लब ग्राउंड में पंडाल लगाकर मूर्तियां तैयार कर रहे हैं। उनकी मेहनत व लगन लोगों के लिए प्रेरणा साबित हो रही है। नागेश के साथ दो लड़के दुर्गम संतोष, हरीश पिन्नापल्ली भी इनका हाथ बटाने इनके पंडाल में काम कर रहे हैं। नागेश बताते हैं कि उनका छोटा सा परिवार है, उनकी पत्नी व दो बच्चे हैं। माता-पिता का देहांत कुछ साल पहले हुआ है। उनके यहां डेढ़ एकड़ खेती है। इस काम के साथ खेती का काम भी करते हैं। खेत मे जो फसल आती है, वो साल भर खाने के काम मे आती है। 
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पाई-पाई जमा करके खरीदी पेंट करने की मशीन
मूर्तियों को कलर कर उभारने के लिए नागेश ने पाई-पाई पैसा जमा कर 10 हजार में पेंट करने की मशीन खरीदी है। काम के शुरुआती समय में हाथ से मूर्तियों में कलर लगाया करते थे। पांच साल पहले उन्होंने मूर्तियां बेचकर थोड़े-थोड़े पैसे जमा किया। उसके बाद उन्होंने तेलंगाना के मंचिरियाल शहर जाकर दस हजार में कम्प्रेसर मशीन ली है। तब जाकर वे बड़ा काम कर रहे हैं।

मेले में लगती है स्टाल
आसपास के मेले मड़ाई में इनकी स्टाल लगती है। वे बताते है कि मेलों में छोटे-छोटे भगवान की मूर्तिया गणेश, दुर्गा, लक्ष्मी, गौरी और मिट्टी से बने खिलौना बनाकर बेचते हैं। जिसकी कीमत पचास रुपये से लेकर दो सौ रुपये तक होती है। यह बेचकर वे एक हजार से दो हजार रुपये तक का फायदा कमा लेते हैं।

जीवन साथी बटाती हैं काम मे हाथ
दुर्गम नागेश ने बताया कि उनकी जीवन साथी सुशीला दुर्गम उनके हर काम मे हाथ बटाती हैं। खेती कार्य से लेकर मूर्ति बनाने के काम में उनका भरपूर सहयोग रहता है। घर के काम के बाद वे बिना थके पति का सहयोग करती हैं।

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