स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं देने से भड़के ग्रामीणों ने SECL की खदान में बंद कराया काम।
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छत्तीसगढ़ के कोरबा में भू-विस्थापितों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं देने से एक बार फिर भू-विस्थापितों का गुस्सा भड़क गया है। SECL की मानिकपुर परियोजना में आउटसोर्सिंग से लिए गए काम में स्थानीय लोगों को महत्व नहीं देने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को तमाम भू-विस्थापित सड़क पर उतर आए और नारायणी संस प्राइवेट लिमिटेड (NSPL) के खिलाफ प्रदर्शन कर परिवहन बाधित कर दिया। इसके चलते खदान में काम बंद हो गया है।
कंपनी और कामगारों के बीच लगातार बन रहा टकराव
ओडिशा की एनएसपीएल कंपनी ने जब से कोरबा क्षेत्र में काम शुरू किया है, उसके खिलाफ हर महीने प्रदर्शन होते हैं। इसके चलते बार-बार कंपनी के काम पर ब्रेक लग जाता है। कई कारणों से कंपनी और कामगारों के बीच टकराव बना हुआ है। एक बार फिर शुक्रवार को स्थानीय लोगों को काम पर नहीं रखने को लेकर प्रदर्शन हुआ। काफी संख्या में लोग एनएसपीएल की साइट के पास एकत्र हुए और धरने पर बैठ गए। लोगों ने बताया कि वादा करने के साथ उसे तोड़ देना कंपनी का फार्मूला बन गया है।
स्थानीय को रोजगार नहीं, आउटसोर्सिंग से काम
शाकंभरी बोर्ड के सदस्य अमन पटेल ने बताया कि SECL मानिकपुर खदान में NSPL कंपनी मिट्टी खुदाई और परिवहन का काम करती है। कंपनी स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं देकर बाहर से लोगों को काम पर रख रही है। इसे लेकर कुछ दिन पहले मानिकपुर खदान पर प्रदर्शन कर काम बंद कराया गया था। उसके बाद एसईसीएल प्रबंधन ने भूविस्थापित और स्थानीय लोगों को रोजगार देने की बात कही थी, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। इसी के चलते प्रदर्शन किया गया।
पहले भी कंपनी के खिलाफ होता रहा है विरोध
इससे पहले नारायणी संस कंपनी पर जरूरत से ज्यादा काम लेने, निर्धारित से कम वेतन देने और सेवा शर्तों का पालन नहीं करने समेत तमाम तरह के आरोप लगते रहे हैं। इन सबके बावजूद कंपनी प्रबंधन की हरकतें ठीक नहीं हो सकी हैं। फिलहाल इस आंदोलन में एमएसपीएल कंपनी काम बंद होने से काफी नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने कहा है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नही होगी तब तक आंदोलन पर डटे रहेंगे। सूचना पर मानिकपुर चौकी पुलिस और एसईसीएल सुरक्षाकर्मी भी मौके पर तैनात हो गए हैं।