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IAS ने फेसबुक पर मुसलमान-दलितों की सजा पर उठाया सवाल, सरकार ने दिया नोटिस

Thu, 28 Jul 2016 01:25 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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छत्तीसगढ़ में एक और आईएएस अधिकारी को फेसबुक पर पोस्ट डालने पर सरकार की नाराजगी का शिकार होना पड़ रहा है। चर्चित आईएएस अधिकारी एलेक्स पॉल मेनन को दलित और मुस्लिमों की मौत से जुड़ी एक पोस्ट डालने पर राज्य सरकार ने कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। सरकार ने इसे आचरण संहिता का उल्लंघन मानते हुए उनसे जवाब मांगा है। 
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बता दें कि एलेक्स पॉल मेनन उस समय चर्चा में आए थे जब साल 2012 में सुकमा का कलेक्टर रहते हुए नक्सलियों ने उनका अपहरण कर लिया था। काफी सक्रिय माने जाने वाले मेनन सामाजिक मुद्दों पर बेलौस होकर अपनी राय रखते रहे हैं। 
एलेक्स ने बीते 18 जून को फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर सवाल पूछा था कि देश की कानून व्यवस्‍था में क्या यह पूर्वाग्रह है कि मौत की सजा पाने वालों में 94 फीसदी मुस्लिम या दलित ही हैं। उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया में काफी चर्चित रही थी इसके अलावा मुख्य धारा की मीडिया में यह काफी सुर्खियों में रही थी, जिसमें एक आईएएस अधिकारी ने न्याय व्यवस्‍था पर ही सवाल उठा दिया था।  
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एफबी पर वेमूला और कन्हैया का समर्थन कर चुके हैं मेनन

मामले के सुर्खियों में आने के बाद छत्तीसगढ़ प्रशासनिक विभाग की सचिव निधि छिब्बर ने बताया कि आईएएस के भारतीय न्यायिक व्यवस्‍था पर इस तरह सवाल उठाने को प्रशासनिक अधिकारियों के लिए बनी आचार संहिता का उल्लंघन माना गया है। 

उन्होंने न्यायिक व्यवस्‍था के बारे में जो कुछ कहा वह मीडिया में भी काफी प्रकाशित हुआ। राज्य सरकार ने इसे काफी गंभीरता से लिया है। इसलिए उन्हें इस संबंध में एक कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया है कि क्यों ने उनके खिलाफ इस संबंध में कार्रवाई की जाए। उन्हें एक महीने के अंदर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। 

फिलहाल छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी के सीईओ के पद पर तैनात मेनन पूर्व में बलरामपुर के कलेक्टर रहने के दौरान भी काफी सुर्खियों में रहे थे। तब उन्होंने जेएनूय के छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और हैदराबाद के शोध छात्र रोहित वेमूला से जुड़ी कई एफबी पोस्ट को शेयर किया था। बाद में भाजपा नेताओं की आपत्ति और कई वरिष्ठ नौकरशाहों की सलाह पर उन्होंने वह पोस्ट डिलीट कर दी थीं। 
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