छत्तीसगढ़ में आरक्षण संशोधन बिल पर लगी बयानबाजी की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। भाजपा और कांग्रेस ने बिल को लेकर फिर एक-दूसरे पर निशाना साथा है। भाजपा ने जहां कांग्रेस सरकार को दिवालिया करियर किलर सरकार बताते हुए कहा है कि आरक्षण का पेंच इन्होंने ही फंसाया है। वहीं कांग्रेस ने भाजपा को आरक्षण किलर पार्टी और प्रधानमंत्री मोदी को करियर किलर पीएम बताया है।
हाईकोर्ट में आरक्षण बचाने सरकार ने कुछ नहीं किया
पूर्व मंत्री अग्रवाल ने कहा कि, साल 2012 से आदिवासी समाज को 32 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा था। 19 सितंबर 2022 को आरक्षण 20 प्रतिशत हो गया। 2 दिसंबर को यानी 70 दिन बाद विधेयक लाए। चार साल से कांग्रेस की सरकार है। हाइकोर्ट में आरक्षण बचाने कुछ नहीं किया। जब इनके अधिकारियों का मामला होता है तो करोड़ो रुपये देकर बड़े वकील लगाते हैं। न अध्यादेश लाये और न सुप्रीम कोर्ट से स्थगन लिया।
भाजपा नहीं चाहती कि राज्यपाल बिल पर हस्ताक्षर करें
वहीं कांग्रेस ने इसे लेकर पलटवार किया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के बयान से स्पष्ट हो गया कि भाजपा नहीं चाहती कि राजभवन आरक्षण विधेयक पर हस्ताक्षर करे। बृजमोहन अग्रवाल ने एक बार भी नहीं कहा कि आरक्षण विधेयक पर तत्काल निराकरण हो। वे बार-बार विधेयक के संबंध में अनावश्यक बातें करते रहे।
सरकार के जवाब के बाद भी राज्यपाल हस्ताक्षर नहीं कर रहीं
उन्होंने कहा कि, भाजपा आरक्षण विधेयक को कानून बनने से रोकने का मंशा रखती है। भाजपा आरक्षण किलर पार्टी, मोदी कैरियर किलर पीएम है। राज्यपाल ने खुद होकर हस्ताक्षर करने की बात कहा था फिर विधेयक क्यों रुका है? किसके कहने पर रुका है? सरकार के 10 सवालों के जवाब के बाद भी हस्ताक्षर क्यों नहीं हो रहा है? यह सब भाजपा की साजिश है। कांग्रेस को श्रेय न मिले इसलिए हस्ताक्षर नहीं होने दे रही है।
भाजपा आरक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट करे
कांग्रेस नेता शुक्ला ने कहा कि, भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि, आदिवासी समाज को दिए गए 32 प्रतिशत आरक्षण पर आपत्ति है या अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए किए गए 27 प्रतिशत आरक्षण से असहमत है? इस बात का विरोध है कि नए आरक्षण विधेयक में अनुसूचित जाति के लिए 13 प्रतिशत आरक्षण के लिए विरोध कर रही है? या गरीब सवर्णों के 4 प्रतिशत आरक्षण के विरोध में भाजपा है।