पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्रों में परचम लहरा रहीं महिलाओं की सियासत में भी भागीदारी बढ़ तो रही है, मगर धीरे-धीरे। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस और भाजपा से कुल 33 महिलाएं मैदान में हैं। उपचुनावों को छोड़ दें तो वर्ष 2003 से 2018 तक हुए चार विधानसभा चुनावों में दोनों दलों ने कुल 86 महिलाओं को टिकट दिया। इनमें से 38 ने जीत दर्ज की थी।
बागियों के बल से फूले क्षेत्रीय दल
क्षेत्रीय दलों की भूमिका राज्य में हमेशा वोटकटवा रही है। कांग्रेस ने 22 विधायकों के टिकट काटे तो भाजपा ने दो विधायकों समेत 50 सीटों पर चेहरे बदले हैं। क्षेत्रीय दल इससे उपजे असंतोष और बगावत का फायदा उठाने की पुरजोर कोशिश में हैं। सबसे ज्यादा बागी जेसीसीजे यानी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) के पाले में हैं। रायपुर संभाग के महासमुंद और बस्तर के अंतागढ़ से कांग्रेस ने विधायकों के टिकट काटे तो उन्होंने जेसीसीजे का दामन थाम लिया। दर्जनभर बागी जेसीसीजे में शामिल हो चुके हैं।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा), हमर राज पार्टी, सर्व आदिवासी समाज और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी जैसे दल ताल ठोक रहे हैं। सियासी गलियारों में चर्चाएं हैं कि कुछ दल भाजपा तो कुछ कांग्रेस को फायदा पहुंचाने के लिए मैदान में हैं। दूसरा यह कि पांच हजार तक वोट काटने वाले दल भाजपा के लिए मुफीद होंगे। यही दल यदि पांच हजार वोटों का आंकड़ा पार करते हैं तो कांग्रेस को लाभ मिल सकता है।
इन दलों में सबसे मजबूत तैयारी जेसीसीजे की नजर आ रही है, जिसकी स्थापना प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने की थी। पिछली बार जीसीसीजे ने पांच सीटें जीती थीं। अब जेसीसीजे की बागडोर अमित जोगी के हाथ है। वह 85 सीटों पर प्रत्याशी उतार चुके हैं। खुद पाटन विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ उतरे हैं।