नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर देश-प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है। इस मामले में छत्तीसगढ़ आम आदमी पार्टी ने केंद्र की मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। आप ने आरोप लगाया कि केंद्र में बैठी मोदी सरकार ,ST, SC और OBC विरोधी है।
नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर देश-प्रदेश की राजनीति गरमाई हुई है। इस मामले में छत्तीसगढ़ आम आदमी पार्टी ने केंद्र की मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। आप ने आरोप लगाया कि केंद्र में बैठी मोदी सरकार ,ST, SC और OBC विरोधी है। उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को न बुलाने और उनसे उद्घाटन न कराने इसका प्रमाण है।
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'आप' प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडी ने बीजेपी और मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से न कराना आदिवासी समाज का अपमान है। भाजपा की मानसिकता दलित विरोधी है। इसलिए राष्ट्रपति को इस मामले में अनदेखा किया गया है। बीजेपी आज भी समाज के वंचित लोगों दलित और आदिवासी समाज को अछूत मानती है। भाजपा ऐसा मानती है कि अगर कोई शुभ कार्य एससी-एसटी से करवाया जाएगा तो अपशगुन हो जाएगा।
'ये आदिवासी समाज का अपमान'
हुपेंडी ने कहा कि संसद भवन के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति को न बुलाकर बीजेपी ने आदिवासियों और पिछड़े समुदायों का अपमान किया है। भारतीय जनता पार्टी दलित, पिछड़ों और आदिवासियों की जन्मजात विरोधी है। देश की पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति को समारोह में न बुलाकर भाजपाई ने संपूर्ण आदिवासी समाज का अपमान किया है। छत्तीसगढ़ का आदिवासी समाज आज इन भाजपाइयों से पूछ रहा है कि क्या ये हमें अशुभ मानते हैं, इसलिए हमें नहीं बुलाते? केंद्र सरकार के इस आदिवासी विरोधी फैसले से छत्तीसगढ़ के आदिवासी आक्रोशित हैं। खुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के भाजपा नेता आदिवासियों के इस अपमान पर चुप्पी साध रखें हैं। आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपाइयों को छत्तीसगढ़ का आदिवासी समाज मुहतोड़ जवाब देगा। आप ने कहा कि इससे पहले भी वह दो बार राष्ट्रपति का अपमान कर चुकी है।
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पहला अपमान
आप ने कहा कि भगवान श्रीराम के मंदिर शिलान्यास में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को नहीं बुलाया गया। नए संसद भवन के शिलान्यास पर भी पीएम मोदी ने रामनाथ कोविंद को नहीं बुलाया।
दूसरा अपमान
आप ने कहा, नए संसद भवन के उदघाटन समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू को न बुलाना। बीजेपी की सरकार में राष्ट्रपति का पद महज प्रतीकात्मक बनकर रह गया है।