छत्तीसगढ़ में पहाड़ी कोरवा परिवार की भूख से आत्महत्या मामले में प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। मामले में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों राजनीति कर रहे हैं। मामले में आज बीजेपी का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मुलाकात करने राजभवन पहुंचा। राज्यपाल को इस केस की जांच रिपोर्ट सौंपकर उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।
राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में लिखा गया है कि राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरवा जनजाति परिवार ने 2 अप्रैल 2023 को सामूहिक आत्महत्या की ह्रदय विदारक घटना पर प्रदेश भाजपा ने 8 सदस्यों की जांच समिति गठित बनाई थी। जांच समिति ने 7 अप्रैल 2023 को ग्राम झुमरीडुमर में पहुंचकर जांच की। इसमें कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। शासन प्रशासन ने सामूहिक आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं किया है। इसकी उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन से मिलने वाले बीजेपी नेताओं में नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, पूर्व सीएम रमन सिंह, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अरूण साव, सांसद सुनील सोनी, पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक,पूर्व सांसद रामविचार नेताम, विधायक पुन्नूलाल मोहले, कृष्णमूर्ति बांधी, भाजपा सरगुजा संभाग प्रभारी संजय श्रीवास्तव शामिल थे।
आत्महत्या के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है: अरुण साव
राज्यपाल से मुलाकात के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद अरुण साव ने मीडिया में कहा कि पहाड़ी कोरवा परिवार की आत्महत्या के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है। हमने राज्यपाल से इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। पहाड़ी कोरवा परिवार को खाद्यान्न नहीं मिला। रोजगार नहीं है। जल जीवन मिशन राज्य सरकार के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। इन्हें पीने का पानी तक नसीब नहीं है।
पहाड़ी कोरवा को मौत के लिए मजबूर होना पड़ रहा : डॉ.रमन सिंह
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने कहा कि कांग्रेस के राज में यह हाल है कि राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पहाड़ी कोरवा को मौत के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कोई मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही। 2 अप्रैल को पहाड़ी कोरवा परिवार की आत्महत्या की हृदय विदारक घटना सामने आई लेकिन मुख्यमंत्री ने वहां जाकर स्थिति देखने और पीड़ित परिवार से मिलने की जरूरत नहीं समझी। नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल ने कहा कि वहां मौके पर गई टीम ने जो देखा, उसकी रिपोर्ट राज्यपाल को दी है। रोजगार मूलक काम नहीं हो रहे। समय पर खाद्यान्न न मिलने से भूख के कारण यह घटना हुई। पानी की व्यवस्था नहीं है। विकास के काम नहीं हो रहे। केंद्र के पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है। जिसके राज में भूख के कारण कोई आत्महत्या करे, उस मुख्यमंत्री को एक मिनट भी पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।
जानें क्या था मामला
भाजपा ने राज्यपाल को बताया कि जशपुर जिले के बगीचा ब्लॉक के झुमरीडूमर पंचायत आश्रित सामरबार गांव के पहाड़ी कोरवा जनजाति परिवार द्वारा सामूहिक आत्महत्या की जांच के तथ्यों से अवगत कराते हुए राज्यपाल को बताया गया कि राजू राम (30), उनकी पत्नी भिनसारी बाई (25), पुत्री देवंती (03) और पुत्र देवन राम (1.5) मृतकों में शामिल हैं। जशपुर जिले के बगीचा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सामरबार में राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र के रूप में पहजाने जाने वाले पहाड़ी कोरवा जनजाति परिवार द्वारा 2 अप्रैल 2023 को सामूहिक आत्महत्या की ह्रदय विदारक घटना पर प्रदेश भाजपा द्वारा चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। जांच समिति के सदस्यों ने 7 अप्रैल 2023 को गांव पहुंच कर जांच की गई, जिसमें तथ्य सामने आए हैं कि गांव में 35 पहाड़ी कोरवा जनजाति एवं 5 भुईहार जाति के परिवार निवासरत हैं लेकिन गांव से लगभग 1 किलोमीटर दूर एक मात्र हैंडपंप है जिससे पीने का पानी भरा जाता है। गांव में जल जीवन मिशन का कार्य अधूरा पड़ा है। केवल सामरबार गांव ही नहीं बल्कि पूरा बगीचा ब्लॉक विकास कार्य में पिछड़ा हुआ है। यहां के 137 गांव में से 114 गांवों में सड़क ही नहीं है। गांव में राशन की दुकान नहीं होने के कारण ग्रामीणों को राशन के लिए 10 किलोमीटर दूर जंगल मार्ग से होकर बिना किसी साधन के जाना पड़ता है। शासकीय स्कूल नहीं होने के कारण बच्चों को पढ़ाई के लिए पहाड़ी चलकर 10 किलोमीटर दूर पढ़ने जाना पड़ता है।
कांग्रेस ने कसा तंज
दूसरी ओर कांग्रेस ने इस मामले में बीजेपी पर तंज कसा है। कांग्रेस के संचार विभाग के चेयरमैन सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाते हुए कहा कि पहाड़ी कोरवा परिवार की सामूहिक आत्महत्या मामले में बीजेपी नेता झूठ परोसने राजभवन गए थे।